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मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: ट्रंप बोले, ‘जमीनी सेना की शायद जरूरत नहीं’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि फिलहाल “बूट्स ऑन द ग्राउंड” यानी जमीनी सेना भेजना जरूरी नहीं हो सकता। न्यूजनेशन की पत्रकार केली मेयर को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमले और अमेरिकी सैनिकों की मौत का जवाब जल्द दिया जाएगा।

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि फिलहाल “बूट्स ऑन द ग्राउंड” यानी जमीनी सेना भेजना जरूरी नहीं हो सकता। न्यूजनेशन की पत्रकार केली मेयर को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हमले और अमेरिकी सैनिकों की मौत का जवाब जल्द दिया जाएगा। सोमवार तक इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। ट्रंप का यह बयान उनके पहले दिए गए बयान से अलग माना जा रहा है। शनिवार को ईरान पर हमले शुरू करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा था कि वे यह नहीं कहते कि जमीनी सेना कभी नहीं भेजी जाएगी। उनका कहना था, “शायद जरूरत न पड़े, लेकिन अगर जरूरी हुआ तो विकल्प खुला है।”

चुनावी वादों में अमेरिका को युद्धों से बाहर निकालने की बात करने वाले ट्रंप ने अब संकेत दिया है कि वॉशिंगटन के पास और भी सैन्य ताकत मौजूद है। उन्होंने कहा, “बड़ा हमला अभी हुआ ही नहीं है।” सोमवार को उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई चार से पांच हफ्तों की अनुमानित समय सीमा से कहीं ज्यादा लंबी चल सकती है। ट्रंप ने पहली बार स्पष्ट रूप से अपने सैन्य उद्देश्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता, नौसेना और परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना है, साथ ही क्षेत्र में सशस्त्र समूहों को मिलने वाले उसके समर्थन को खत्म करना है। हालांकि, उन्होंने इस्लामी गणराज्य की सत्ता को गिराने की बात नहीं की।

शनिवार से अमेरिका और इज़राइल लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो चुकी है। जवाब में ईरान ने पूरे मध्य पूर्व में मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने की खुली चेतावनी दी है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जनरल सरदार जब्बारी ने कहा, “जो भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे जला दिया जाएगा।” यह रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक समुद्री तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। यदि इसे बाधित किया गया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

इसी बीच, मध्य पूर्व के अधिकांश हिस्सों में हवाई क्षेत्र बंद है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर व्यापक असर पड़ा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस संघर्ष में तब शामिल हुआ जब उसे पता चला कि उसका सहयोगी इज़राइल ईरान पर हमला करने वाला है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि आशंका थी कि यदि ईरान पर हमला हुआ तो वह तुरंत अमेरिका को निशाना बनाएगा, इसलिए पहले से तैयारी की गई।

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