सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से आग्रह किया है कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित की जाए। रे ने प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के अधीन ग्रुप-बी (नॉन-गज़ेटेड) और ग्रुप-सी पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष तय की जाए तथा स्थायी निवासियों के लिए 5 वर्ष की अतिरिक्त छूट प्रदान की जाए, ठीक उसी प्रकार जैसे हाल ही में लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश के लिए जारी आदेश में किया गया है। सांसद ने 26 जुलाई 2025 के अपने पहले पत्र का भी उल्लेख किया और चिंता व्यक्त की कि ए एंड एन प्रशासन पुराने आयु मानक — पुरुषों के लिए 18 से 33 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 से 38 वर्ष — को ही जारी रखे हुए है, जिसके कारण अनेक योग्य द्वीपवासी युवा केवल इसलिए अयोग्य घोषित हो रहे हैं क्योंकि द्वीपों की भौगोलिक अलगाव के चलते उन्हें उच्च शिक्षा तक देर से पहुँच मिलती है और यहां रोजगार के अवसर भी सीमित हैं। रे ने यह भी रेखांकित किया कि लद्दाख, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा सहित अनेक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सामाजिक–आर्थिक स्थितियों और रोजगार बाजार में देर से प्रवेश को देखते हुए आयु सीमा 40 से 42 वर्ष के बीच निर्धारित की जा चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में परिस्थितियाँ इन राज्यों से भी अधिक चुनौतीपूर्ण हैं, जैसे सरकारी नौकरियों का बेहद छोटा बाजार, मुख्य भूमि से दूरी के कारण शिक्षा में देरी, बाहरी अवसरों के लिए अधिक खर्च और पुरानी आयु सीमा की वजह से बड़ी संख्या में योग्य युवा का पात्रता से बाहर हो जाना। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सांसद रे ने गृह मंत्रालय से अनुरोध किया है कि ए एंड एन प्रशासन के तहत सभी ग्रुप-बी (एन.जी.) और ग्रुप-सी पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष की जाए और स्थायी निवासियों/स्थानीय उम्मीदवारों के लिए 5 वर्ष की अतिरिक्त छूट प्रदान की जाए, जैसा कि लद्दाख में किया गया है। रे ने कहा कि यह विशेष प्रावधान अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के युवाओं में आशा, न्याय और विश्वास बहाल करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।