नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के लंबा खिंचने की स्थिति में सरकार अर्थव्यवस्था के कमजोर वर्गों, खासकर सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए और राहत पैकेज ला सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार पहले ही पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे कई कदम उठा चुकी है और जरूरत पड़ने पर आगे भी राहत उपाय करने से पीछे नहीं हटेगी।
सरकार ने पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल को इस कर से मुक्त कर दिया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों पर कम पड़े। साथ ही, देश में उपलब्धता बढ़ाने के लिए डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर फिर से शुल्क लगाया गया है।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इस महीने की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो बाद में घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। इससे पहले सरकार ने निर्यातकों को उनकी निर्यात प्रतिबद्धताएं पूरी करने के लिए कुछ रियायतें दी थीं। पश्चिम एशिया संकट के बाद से कारोबारी समुदाय की दिक्कतें बढ़ी हैं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि मौजूदा हालात में सरकार को सबसे अधिक प्रभावित व्यवसायों और परिवारों को तुरंत राहत देने की जरूरत है, साथ ही भविष्य की जरूरतों के लिए संसाधन भी तैयार करने होंगे। नागेश्वरन ने शनिवार को जारी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा कि संकट को देखते हुए हमें खर्च की प्राथमिकता नए सिरे से तय करने और प्रभावित कारोबारी क्षेत्रों और परिवारों को लक्षित राहत प्रदान करने की जरूरत है।