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अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्धविराम से राहत, स्थायी शांति की राह मुश्किल

दो सप्ताह के युद्धविराम से तनाव कम, लेकिन समझौते तक पहुंचने में कई राजनीतिक और रणनीतिक चुनौतियां

Bishakhaa Tiwari

मेलबर्न : अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच प्रस्तावित दो सप्ताह के युद्धविराम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने राहत की सांस ली है, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति की राह अब भी लंबी और जटिल बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धविराम बातचीत के लिए एक अवसर जरूर देता है, पर अंतिम समाधान तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

छह सप्ताह तक चले संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों तथा ईरान की जवाबी कार्रवाई से हुई थी। इस दौरान तीनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर भी असर पड़ा। इससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हुई।

शुरुआत में अमेरिका को त्वरित जीत की उम्मीद थी, लेकिन ईरान ने मजबूत सैन्य और रणनीतिक क्षमता दिखाते हुए जवाबी हमले जारी रखे। फारस की खाड़ी और इजराइल में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, जबकि कई देशों ने इस युद्ध का समर्थन करने से इनकार कर दिया। रूस और चीन ने भी तनाव कम करने की अपील की।

युद्ध की बढ़ती लागत अमेरिका और इजराइल दोनों के लिए चुनौती बन गई। अमेरिका पर प्रतिदिन भारी सैन्य खर्च का दबाव बढ़ा, जबकि इजराइल को संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, ईरान की आंतरिक एकजुटता और लगातार जवाबी हमलों ने संघर्ष को लंबा खींच दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, युद्धविराम के बाद व्यापक शांति समझौते के लिए दोनों पक्षों के प्रस्तावों पर सहमति जरूरी होगी, जिसमें प्रतिबंधों में राहत, परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। यदि सभी पक्ष ईमानदारी से बातचीत करते हैं, तो क्षेत्र में संतुलित और सहयोगात्मक सुरक्षा ढांचे की संभावना बन सकती है, लेकिन फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है।

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