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टोपी से इनकार, अंगवस्त्र स्वीकार Samrat Choudhary का सियासी संदेश

जनता दरबार में फैसले ने बढ़ाई चर्चा, वैचारिक संकेतों पर तेज हुई बहस

बिहार की सियासत में Samrat Choudhary का नया अंदाज़ चर्चा में है। कार्यकर्ता सम्मान जनता दरबार के दौरान उन्होंने एक मुस्लिम कार्यकर्ता का दिया अंगवस्त्र तो स्वीकार किया, लेकिन टोपी पहनने से विनम्रता से इनकार कर दिया। इस फैसले को बीजेपी के भीतर उनके “क्राइसिस मैनेजमेंट” और वैचारिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

इस घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि भले ही सम्राट चौधरी सीधे संघ पृष्ठभूमि से न आते हों, लेकिन उनके फैसलों और बयानों में संघ की विचारधारा की झलक दिखने लगी है।

जनता दरबार में अल्पसंख्यक समुदाय के एक कार्यकर्ता ने जब उन्हें टोपी पहनाने की कोशिश की, तो उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन किया, लेकिन टोपी नहीं पहनी। वहीं, उसी व्यक्ति द्वारा दिया गया गमछा उन्होंने सम्मान के साथ गले में डाल लिया।

राजनीतिक जानकार इसे एक सोचा-समझा संदेश मान रहे हैं, जो उनके नेतृत्व शैली और बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है।

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