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JU में 2011 से सुरक्षा कर्मियों की भर्ती बंद, व्यवस्था पर गंभीर सवाल

58 एकड़ के कैंपस में 15 हजार लोगों की सुरक्षा, सीमित सुरक्षाकर्मी

कोलकाता : जादवपुर विश्वविद्यालय में बुधवार की रात हुई हिंसा ने कैंपस की वर्षों पुरानी सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। करीब 60 एकड़ में फैले परिसर में लगभग 15 हजार छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सीमित संख्या में सुरक्षाकर्मियों के भरोसे है। सवाल है कि क्या केवल सीसीटीवी के सहारे इतने बड़े कैंपस की सुरक्षा संभव है?

जेयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी मुकुल चंद्र दास के मुताबिक 2006 से 2011 के बीच कई बार सुरक्षा कर्मियों की भर्ती हुई, लेकिन 2011 के बाद नई भर्ती नहीं हुई। वर्तमान में करीब 30 सेवानिवृत्त सैनिक और 41 निजी सुरक्षा गार्डों के पैनल के बावजूद छुट्टी और शिफ्ट व्यवस्था के कारण एक समय में सीमित कर्मी ही पूरे परिसर की निगरानी कर पाते हैं। रात में दबाव और बढ़ जाता है।

विश्वविद्यालय में 55 से अधिक सीसीटीवी कैमरे हैं, लेकिन करीब आधा दर्जन फिलहाल रखरखाव के कारण बंद हैं। कैमरे घटनाओं को रिकॉर्ड कर सकते हैं, लेकिन हिंसक भीड़ को रोक नहीं सकते। सुरक्षा अधिकारी जगन्नाथ साहू ने कहा कि गार्ड पूरी जिम्मेदारी से ड्यूटी करते हैं, लेकिन स्टाफ की कमी बड़ी समस्या है।

रजिस्ट्रार सलीम बख्श मंडल ने भी इसे वास्तविक समस्या बताते हुए जल्द समाधान का भरोसा दिया। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, उनके पास हिंसक भीड़ का सामना करने के लिए हथियार तक नहीं हैं। ऐसे में मुख्य द्वार से बड़ी संख्या में लोगों के जबरन प्रवेश की स्थिति में सीमित सुरक्षा बल आखिर कितनी देर तक टिक पाएंगे?

अब जेयू में नियमित भर्ती, बेहतर प्रवेश नियंत्रण, पर्याप्त रात्रि बल और पुलिस समन्वय की जरूरत है। बुधवार की घटना ने साफ कर दिया कि तकनीक निगरानी कर सकती है, लेकिन संकट के समय पर्याप्त और प्रशिक्षित मानवबल का विकल्प नहीं बन सकती।

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