कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बागी विधायक बिष्णु प्रसाद शर्मा बृहस्पतिवार को राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये। राज्य की कार्सियांग विधानसभा सीट से विधायक शर्मा यहां तृणमूल कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी में शामिल हुए। शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु और उद्योग मंत्री शशि पांजा ने तृणमूल में उनका स्वागत किया। शर्मा के जाने से विधानसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या घटकर 64 हो गई है।शर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह तृणमूल में टिकट के लिए नहीं बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति के साथ जुड़ने के लिए शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक आजाद पंछी हूं। मैंने कार्सियांग की जनता के जनादेश का अनादर नहीं किया है। कुछ लोग मेरी आलोचना करेंगे, लेकिन मुझे परवाह नहीं है।’’
गोरखा लोग 17 वर्षों से अंधेरे में जी रहे हैं
भाजपा पर गोरखाओं को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘गोरखा लोग 17 वर्षों से अंधेरे में जी रहे हैं। भाजपा उन्हें मशाल दिखाकर उसे सूरज बता रही है। क्या मुझे अपने मतदाताओं के साथ जुमला राजनीति खेलनी चाहिए? भाजपा गोरखाओं के लिए कुछ नहीं करेगी।’’ केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के लिए आवंटित धनराशि को रोक दिया गया है। शर्मा ने कहा कि वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘‘विकास मॉडल’’ के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे मेरे गोरखा भाइयों और बहनों ने चुना था, लेकिन मैं उनके लिए काम नहीं कर पाया। भाजपा ने वादे तो किए लेकिन कुछ नहीं किया। जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं हुआ।’’
शर्मा ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग का यह कहते हुए समर्थन किया था कि दार्जिलिंग पहाड़ियों पर अधिक ध्यान देने और विकास की आवश्यकता है। उन्होंने यह दावा करते हुए भाजपा के प्रति कई बार असंतोष व्यक्त किया था कि क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने के आश्वासन के बावजूद, पार्टी जमीनी स्तर पर अपना वादा निभाने में नाकाम रही। शर्मा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में दार्जिलिंग सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह इसमें सफल नहीं हो पाये थे और भाजपा के राजू बिस्टा ने सीट बरकरार रखी थी।
इस बीच, विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष ने दावा किया कि शर्मा का अपने निर्वाचन क्षेत्र में कोई जनाधार नहीं है और वह लंबे समय से पार्टी के संपर्क में नहीं हैं। घोष ने कहा, ‘‘उनके तृणमूल में शामिल होने से पर्वतीय क्षेत्रों में भाजपा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।’’ भाजपा के एक अन्य नेता, राहुल सिन्हा ने शर्मा पर ‘‘पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के साथ विश्वासघात’’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे नेताओं को ‘‘तृणमूल कांग्रेस में जगह मिल जाती है’’।