यह यात्रा पुरी में इस बार 16 जुलाई से शुरू होगी, लेकिन इसका अजीब पहलू यह है कि इस्कॉन पहले ही कई देशों में इस यात्रा का आयोजन कर चुका है। साथ ही कई देशों में अलग-अलग तारीखों पर यह यात्रा निकाली जाने वाली है। पूरा विवाद इन्हीं तारीखों को लेकर है।
दुनियाभर में निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर पुरी मंदिर की समिति और इस्कॉन के बीच विवाद खड़ा हो गया है । यह यात्रा पुरी में इस बार 16 जुलाई से शुरू होगी, लेकिन इसका अजीब पहलू यह है कि इस्कॉन पहले ही कई देशों में इस यात्रा का आयोजन कर चुका है। साथ ही कई देशों में अलग-अलग तारीखों पर यह यात्रा निकाली जाने वाली है। पूरा विवाद इन्हीं तारीखों को लेकर है। इस मामले पर पुरी के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने नाराजगी जताई है। गजपति महाराजा मंदिर के फैसले लेने वाली जगन्नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष भी हैं । उन्होंने कहा कि भगवान की रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीय स्थिति से शुरू होनी चाहिए । स्कंद पुराण में इसका जिक्र भी है और अन्य शास्त्रों में भी उल्लेख है । इस्कॉन परंपरा तोड़ रहा है। जब हर धर्म और मजहब में पर्वों की तिथि तय होती है तो इस्कॉन शास्त्रों के मुताबिक तय नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहा ? खबरों के अनुसार पुरी मंदिर से जुड़े विद्वानों ने इस्कॉन से जुड़े लोगों से बात की है, लेकिन नतीजा नहीं निकल पाया है । पुरी के गजपति महाराजा का कहना है कि भगवान जगन्नाथ के मामले में कैसे नियमों के खिलाफ जा सकते हैं । वे महर्षि वेदव्यास और स्कंद पुराण के विरुद्ध क्यों जा रहे हैं ?
'इस्कॉन कृष्ण जन्माष्टमी पर नियम मानता है तो रथयात्रा में क्यों नहीं ?'
एक बातचीत में गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने बताया कि दो दशक से इस्कॉन से इस पर बातचीत जारी थी । 2021 में उन्होंने भारत में होने वाली रथयात्राओं को लेकर सहमति भी दे दी थी, लेकिन भारत के बाहर वे तय तिथि पर यात्रा निकालने के लिए तैयार नहीं हैं, यह बहुत निराशाजनक है। हमने उनसे अनुरोध किया था कि फैसले पर विचार करें, लेकिन उन्होंने चिट्ठी लिखकर मना कर दिया है। जब वे कृष्ण जन्माष्टमी पर नियमों का उल्लंघन नहीं करते तो रथ यात्रा पर क्यों करते हैं।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इसे लेकर कहा कि 12 जुलाई को मीडिया में प्रसारित इस्कॉन की ओर से जारी बयान झूठे हैं और इसका उद्देश्य असमय जगन्नाथ रथ यात्रा के संबंध में जनता को गुमराह करना है।
इस्कॉन का तर्क यह है
वहीं पुरी जगन्नाथ मंदिर की प्रमुख समिति ने इस्कॉन के इस दावे को खारिज कर दिया कि मनमाने दिनों में रथयात्रा का आयोजन शास्त्रों के मुताबिक है। उन्होंने कहा कि यह दुनियाभर में भक्तों को गुमराह करने का प्रयास है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने इसे लेकर कहा कि 12 जुलाई को मीडिया में प्रसारित इस्कॉन की ओर से जारी बयान झूठे हैं और इसका उद्देश्य असमय जगन्नाथ रथ यात्रा के संबंध में जनता को गुमराह करना है। खबरों के अनुसार इस्कॉन के राष्ट्रीय प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंद दास ने समिति के विचारों पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया । उन्होंने कहा कि हमने एसजेटीए का बयान नहीं देखा, इसलिए टिप्पणी करना कठिन है। हालांकि एक चैनल से बातचीत में युधिष्ठिर गोविंद दास ने कहा कि दुनियाभर में 1000 से अधिक भगवान जगन्नाथ की यात्राएं निकलती हैं, उनमें से 500 तो भारत के अलग-अलग शहरों में निकलती हैं। भारत में जो यात्राएं निकलती हैं उनकी तिथि जगन्नाथ मंदिर प्रशासन से बातचीत के बाद तय होती है, लेकिन दुनिया के अलग-अलग देशों का मौसम और नियम कानून अलग हैं, इसलिए हर जगह एक साथ यात्रा निकलना संभव नहीं है।
उन्होंने इस्कॉन पर यह आरोप भी लगाया कि वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं पुरी के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने रथ यात्रा को असमय आयोजित करने को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मंजूरी दी है।
पुरी मंदिर समिति ने यह आरोप लगाया
पुरी जगन्नाथ मंदिर की प्रमुख समिति ने बताया कि एसजेटीए और इस्कॉन के विद्वानों ने विगत 20 मार्च 2025 को भुवनेश्वर में एक मीटिंग की थी, उस बैठक में शास्त्रों और कुछ अन्य आधारों पर विभिन्न तिथियों पर भारत के बाहर रथ यात्रा के आयोजन को उचित ठहराने का प्रयास किया गया, हालांकि मंदिर के विद्वानों प्रामाणिक शास्त्रों का हवाला देते हुए इन्हें खारिज कर दिया। उन्होंने इस्कॉन पर यह आरोप भी लगाया कि वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं पुरी के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने रथ यात्रा को असमय आयोजित करने को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मंजूरी दी है। पुरी मंदिर समिति ने साफ किया है कि यह जानबूझकर और दुर्भावना से पूर्ण बयान है, जो गजपति महाराजा की सत्यनिष्ठा पर एक कलंक जैसा है।
इस्कॉन की बेंगलुरु इकाई ने क्या कहा ?
उधर अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) की बेंगलुरु इकाई ने कहा कि वे पुरी के जगन्नाथ मंदिर द्वारा तय किए नौ दिनों के दौरान ही अपने केंद्रों पर रथ यात्रा का आयोजन करेंगे। यह फैसला मायापुर मुख्यालय वाले इस्कॉन समूह के इस मामले पर अपनाए गए रुख से अलग है। उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस्कॉन की बेंगलुरु इकाई दूसरे इस्कॉन समूह, जिनका मुख्यालय पश्चिम बंगाल के मायापुर में है, उनसे अलग और स्वतंत्र संस्था है। बता दें कि इस्कॉन के मायापुर मुख्यालय ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर की उस अपील को ठुकरा दिया, जिसमें दुनियाभर के देशों में अलग अलग तारीखों पर रथयात्रा आयोजित करने पर फिर से विचार करने को कहा गया। इस्कॉन ने अपने बयान में कहा कि वह सम्मानपूर्वक इस चर्चा से हमेशा अलग हो रहा है।
राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
पुरी के राजा गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने मांग की मायापुर मुख्यालय वाले इस्कॉन को परंपरा से हटकर अलग-अलग तारीखों पर रथयात्रा आयोजित करने से रोका जाना चाहिए ।