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समुद्री आत्मनिर्भरता से लौटेगा भारत का गौरव : राजनाथ सिंह

समुद्री शक्ति पर दिया जोर

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: भारत को एक मजबूत समुद्री शक्ति बनाने और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश की सुरक्षा और आर्थिक भविष्य के लिए समुद्री ताकत बेहद महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को कोलकाता में आयोजित Sagar Sankalp Conclave के उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा कि एक मजबूत नौसेना और विकसित जहाज निर्माण उद्योग आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद हैं। यह कॉन्क्लेव द वीक और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स>; (GRSE) की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित किया गया, जिसमें नौसेना नेतृत्व, नीति-निर्माताओं और रक्षा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने भारत के समुद्री सुरक्षा ढांचे और शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने पर चर्चा की।

रक्षा सुधारों से बढ़ी स्वदेशी क्षमता

रक्षा मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए रक्षा सुधारों के जरिए भारत ने घरेलू डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा दिया है। आज भारतीय शिपयार्ड अधिक स्वदेशी तकनीक के साथ जटिल समुद्री प्लेटफॉर्म तैयार कर रहे हैं, जो देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत को समुद्री तैयारी, नवाचार और मजबूत घरेलू सप्लाई चेन पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

सागरमाला से बढ़ेगी समुद्री क्षमता: शांतनु ठाकुर

इस अवसर पर केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि भारत अपनी समुद्री यात्रा के एक अहम मोड़ पर पहुंच चुका है और Sagarmala Programme के जरिए देश अपनी समुद्री क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि 2015 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम का उद्देश्य बंदरगाहों का आधुनिकीकरण, बेहतर कनेक्टिविटी और पोर्ट-आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए भारत को दुनिया की शीर्ष पांच समुद्री शक्तियों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

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