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चुनाव के बीच स्कूलों में डेंगू जागरूकता कार्यक्रम पर सवाल

शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को दिए सख्त आदेश

प्रधानाध्यापकों ने रिपोर्ट जमा करने में जताई व्यावहारिक समस्या

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा डेंगू से बचाव के लिए राज्य के सभी स्कूलों को सक्रिय कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य न केवल स्कूल परिसर को सुरक्षित बनाना है, बल्कि छात्रों के माध्यम से आसपास के क्षेत्रों में भी जागरूकता फैलाना है। हालांकि, शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के एक वर्ग ने इन निर्देशों के व्यावहारिक क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार, विकास भवन से सभी जिलों के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के जिला निरीक्षकों (DI) को एक निर्देश जारी किया गया। यह निर्देश 14 अप्रैल को मुख्य सचिव स्तर पर हुई बैठक के बाद जारी हुआ, जिसमें डेंगू की रोकथाम पर विस्तार से चर्चा की गई थी। निर्देश में स्कूलों को दो स्तरों पर कार्य करने को कहा गया है जिसमें निवारक उपाय और जागरूकता अभियान शामिल हैं। निवारक उपायों के तहत स्कूलों को प्रतिदिन परिसर की साफ-सफाई सुनिश्चित करने और कहीं भी पानी जमा न होने देने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रधानाध्यापकों ने उठाये समय और व्यवस्था से जुड़े सवाल

बीटी रोड हाई स्कूल की प्रधानाध्यापिका संघमित्रा भट्टाचार्य ने कहा कि यह एक सराहनीय पहल है और हम हर साल इस तरह के अभियान चलाते हैं। लेकिन चुनाव के दौरान, जब केंद्रीय सुरक्षा बल स्कूल परिसर में तैनात हैं, छात्रों को एकत्र करना संभव नहीं है। ऐसे में इस कार्यक्रम को लागू करना कठिन है। साथ ही शिक्षा विभाग द्वारा कुछ ही दिनों के भीतर रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है जो वर्तमान चुनावी परिस्थितियों में व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही ऐसे कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए।

स्थानीय सहयोग की कमी भी बनी बड़ी चुनौती

एक अन्य शिक्षक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि स्कूलों में सफाई के बाद कचरा निस्तारण की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। इस कारण नगर पालिकाओं और पंचायतों के सहयोग की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हालांकि, एक जिला निरीक्षक ने स्पष्ट किया कि जिन स्कूलों को चुनाव के कारण दिक्कतें हैं, उन्हें अस्थायी छूट दी जा सकती है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल अब भी बने हुए हैं।

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