भुवनेश्वर। पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा से जुड़ी एक और ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। इस वर्ष भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के पहियों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में स्थापित किया जाएगा। यह निर्णय ओडिशा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने मंगलवार को बताया कि उन्होंने भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर यह प्रस्ताव रखा था। राष्ट्रपति ने प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार करते हुए तीनों रथों के पहियों को राष्ट्रपति भवन में स्थापित करने की सहमति दी। पाढ़ी ने इसे ओडिशा और भगवान जगन्नाथ के श्रद्धालुओं के लिए गर्व का क्षण बताया। राष्ट्रपति भवन में भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’, भगवान बलभद्र के ‘तालध्वज’ और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथों के पहिए स्थापित किए जाएंगे। इन्हें ओडिशा की सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत के स्थायी प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि देश-विदेश से आने वाले आगंतुक जगन्नाथ परंपरा से परिचित हो सकें।
पुरी की रथयात्रा की परंपरा के अनुसार तीनों रथ हर वर्ष नई लकड़ी से बनाए जाते हैं। उत्सव समाप्त होने के बाद रथों को विधि-विधान से खोला जाता है। रथों की लकड़ी का एक हिस्सा श्री जगन्नाथ मंदिर की रसोई में धार्मिक उपयोग के लिए लगाया जाता है, जबकि कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों की श्रद्धालुओं के बीच नीलामी की जाती है। इसके बाद अगले वर्ष के लिए नए रथों का निर्माण आरंभ होता है।
यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति भवन में ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान को स्थान मिल रहा है। इससे पहले 29 अक्टूबर 2024 को कोणार्क सूर्य मंदिर के प्रसिद्ध पत्थर के पहियों की चार प्रतिकृतियां राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र और अमृत उद्यान में स्थापित की गई थीं। अब पुरी रथयात्रा के वास्तविक रथों के पहिए वहां स्थापित होने से जगन्नाथ संस्कृति की पहचान राष्ट्रीय धरोहर के रूप में और अधिक मजबूत होगी।