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हावड़ा : सरकारी अस्पताल के लिए सड़क पर उतरे लोग

Nidhi Gupta

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : हावड़ा के निश्चिंदा इलाके में लगभग 183 कट्ठा जमीन को कौड़ियों के भाव प्रमोटर को बेचने के विरोध में स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि जिस जमीन पर सरकारी अस्पताल बनना था, उसे तृणमूल सरकार के हटने से ठीक पहले एक स्थानीय तृणमूल नेता के माध्यम से एक प्रमोटर को सौंप दिया गया। स्थानीय संगठन के सचिव सुमन मित्र के अनुसार, इस जमीन का एक ऐतिहासिक महत्व है। वर्ष 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विधानचंद्र राय ने स्थानीय मोती बाबू नामक व्यक्ति से यह 183 कट्ठा जमीन खरीदी थी। उस समय दुर्गापुर से गंगा नदी के नीचे से आने वाली कुकिंग गैस को यहां स्टोर किया जाता था। हालांकि, बाद में यह व्यवस्था बंद हो गई और वाममोर्चा के शासनकाल में भी इस जमीन का कोई विशेष उपयोग नहीं हुआ।

50 करोड़ की जमीन औने-पौने दाम में बेचने का आरोप

आगे आरोप लगाया गया कि तृणमूल शासन के दौरान इस जमीन पर सरकारी अस्पताल बनाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके विपरीत, लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य की इस सरकारी जमीन को महज 9 करोड़ 75 लाख रुपये में प्रमोटर को बेच दिया गया, जहां फिलहाल निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। इसी धोखाधड़ी और जमीन 'बिक्री' की जांच की मांग को लेकर 'गैसग्रिड अस्पताल निर्माण कमेटी' के नेतृत्व में निश्चिंदा गर्ल्स स्कूल से गैस फैक्ट्री के मैदान तक एक विरोध मार्च निकाला गया। स्थानीय लोगों द्वारा मांग की गई है कि यहां किसी निजी प्रोजेक्ट की जगह श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम पर एक सरकारी अस्पताल का निर्माण कराया जाए। निवासियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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