रावलकोट : पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी विरोध प्रदर्शन 12वें दिन भी जारी है। हजारों प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों की मांग को लेकर रावलकोट के ईदगाह मैदान में डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी आवाज दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की ओर से सख्ती की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नियंत्रण रेखा (LoC) के पास बट्टल गांव से रावलकोट जा रहे लोगों पर कथित तौर पर फायरिंग की गई, जिसमें कई लोग प्रभावित हुए। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर निहत्थे लोगों के खिलाफ बल प्रयोग करने और कई युवाओं के लापता होने के आरोप लगाए हैं।
विरोध प्रदर्शन के आयोजकों का दावा है कि बड़ी संख्या में लोग रावलकोट में एकत्र हैं और क्षेत्र में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि इंटरनेट सेवाएं बंद होने और सीमाओं पर पाबंदियों के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में शामिल ख्वाजा मेहरान ने आरोप लगाया कि 5 जून से क्षेत्र में हो रही कार्रवाई के पीछे कुछ प्रभावशाली समूहों का दबाव है। उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उनके पास अपने दावों से जुड़े सबूत हैं।
वहीं, एक अन्य आयोजक सरदार उमर नजीर ने कहा कि लोग अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे हैं और वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि PoJK में पिछले कई दिनों से इंटरनेट बंद है और कई इलाकों में आवाजाही प्रभावित हुई है। उनका आरोप है कि खाद्य सामग्री की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
PoJK में जारी यह आंदोलन अब क्षेत्रीय राजनीति और मानवाधिकारों को लेकर एक बड़े विवाद का मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत या टकराव की दिशा पर सबकी नजर बनी हुई है।