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पैगंबर मोहम्मद टिप्पणी केस: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

कोर्ट बोला- पहले सक्षम प्राधिकरण के पास जाएं, हर मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं लाया जा सकता

पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों को सनसनीखेज बनाने की जरूरत नहीं है और याचिकाकर्ता को पहले कानून के तहत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नाज़िया इलाही खान पर जून में एक पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर मोहम्मद और उनके परिवार के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप है। इसके बाद उनके खिलाफ विभिन्न राज्यों में कई FIR दर्ज की गईं।

मामले की सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने जनहित याचिका (PIL) को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार करते हुए कहा कि पहले संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत का संविधान अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन अनुच्छेद 19(2) के तहत इस अधिकार पर युक्तिसंगत प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग किसी समुदाय की गरिमा या सामाजिक शांति को प्रभावित करने के लिए नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी बयान से कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही अदालत ने यह संदेश भी दिया कि हर विवाद को सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाने के बजाय पहले निचली अदालतों और संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

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