निधि, सन्मार्ग संवाददाता
बनगांव/कोलकाता : आमतौर पर सरस्वती पूजा या लक्ष्मी पूजा जैसे त्योहारों के दौरान पुरोहितों (पंडितों) की भारी किल्लत हो जाती है। शुभ मुहूर्त में पूजा कराने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और घर के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को लंबे समय तक उपवास रखना पड़ता है। लेकिन इस बार उत्तर 24 परगना के बनगांव में इस समस्या का समाधान एक अनोखे तरीके से निकाला गया। यहां पहली बार किसी पुरोहित की अनुपस्थिति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से देवी सरस्वती की आराधना संपन्न की गई।
यह अभिनव पहल बनगाँव के सुभाषपल्ली निवासी सुशोभन घोष ने की। उनके घर पर भी हर साल की तरह पूजा का आयोजन था, लेकिन पुरोहित के समय पर न मिल पाने के कारण परिवार के सदस्य परेशान थे। सुशोभन ने देखा कि पुरोहित के इंतजार में बच्चे और बुजुर्ग भूखे बैठे हैं। तभी उनके मन में विचार आया कि यदि तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है, तो क्यों न एआई की मदद ली जाए। उन्होंने अपने मोबाइल के जरिए एआई का उपयोग करके सरस्वती पूजा के मंत्रों की शुद्धता की जाँच की। जब उन्हें यकीन हो गया कि एआई पूरी सटीकता और सही लय के साथ मंत्रोच्चार कर रहा है, तो उन्होंने इसी माध्यम से पूजा शुरू करने का निर्णय लिया।
पूजा के दौरान मोबाइल फोन को वेदी के पास रखा गया। एआई ने जैसे ही मंत्र बोलना शुरू किया, सुशोभन के परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों ने पूरी श्रद्धा के साथ उन मंत्रों को दोहराया। पुष्पहार अर्पण से लेकर पुष्पांजलि तक की पूरी प्रक्रिया एआई द्वारा निर्देशित मंत्रों के माध्यम से पूरी की गई। मोहल्ले के बच्चों और बड़ों ने बड़े उत्साह के साथ इस "डिजिटल पूजा" में हिस्सा लिया। इलाके के लोग इस बात से हैरान थे कि तकनीक का उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों में इतने प्रभावी ढंग से भी किया जा सकता है।
इस घटना ने स्थानीय पुरोहित समाज के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ कुछ पुरोहितों ने इसे तकनीक का सकारात्मक प्रयोग माना और कहा कि आपात स्थिति में यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है, वहीं कुछ अन्य ने चिंता जताई। कुछ पारंपरिक पुरोहितों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक उनके व्यवसाय और जीविकोपार्जन पर असर डाल सकती है। उनका तर्क है कि पूजा में केवल मंत्र ही नहीं, बल्कि पुरोहित की उपस्थिति और भाव का भी अपना महत्व होता है। हालांकि, सुशोभन घोष और उनके पड़ोसियों के लिए यह प्रयोग सफल रहा, जिसने उनका समय बचाया और पूजा को बिना किसी बाधा के संपन्न कराया।
यह घटना दर्शाती है कि आने वाले समय में एआई हमारे जीवन के सबसे पारंपरिक हिस्सों में भी अपनी जगह बना सकता है।