टॉप न्यूज़

राष्ट्रपति–ममता टकराव तेज, TMC का मुलाकात अनुरोध खारिज

सिलीगुड़ी विवाद के बाद बढ़ी राजनीतिक तल्खी; ममता बोलीं—“बीजेपी के इशारे पर राजनीति न करें”

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद और गहरा गया है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu के कार्यालय ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के अनुरोध को “समय की कमी” का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार, Trinamool Congress के एक वरिष्ठ नेता ने सोमवार को राष्ट्रपति से समय मांगते हुए पत्र लिखा था। इसमें 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मिलने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया था, ताकि राज्य में आदिवासी समुदायों के लिए चल रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा सके। बाद में पार्टी ने अगले सप्ताह के लिए फिर से समय देने का अनुरोध भी किया।

इस घटनाक्रम को राष्ट्रपति और बंगाल सरकार के बीच हाल ही में बढ़े तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

विवाद की शुरुआत सिलीगुड़ी में आदिवासी कल्याण से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान हुई थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बागडोगरा हवाईअड्डे पर उनके स्वागत के लिए मुख्यमंत्री या किसी कैबिनेट मंत्री के मौजूद न होने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य में संथाल और अन्य आदिवासी समुदायों तक केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ ठीक से नहीं पहुंच रहा है।

कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा, “क्या यहां संथाल और आदिवासियों का विकास हो रहा है? मुझे ऐसा नहीं लगता। केंद्र सरकार की सुविधाएं भी शायद उन तक पूरी तरह नहीं पहुंच रहीं। ऐसा लगता है कि कुछ लोग उन्हें यहां आने से रोक रहे हैं।”

राष्ट्रपति के इस बयान पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे “राजनीतिक टिप्पणी” बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान राष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। ममता ने कहा, “मैं राष्ट्रपति से विनम्र निवेदन करती हूं कि ऐसे बयान न दें जो आपके पद की गरिमा के अनुकूल न हों। आपने केवल एक समुदाय की बात की, जबकि बंगाल में कई अन्य समुदाय भी हैं।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के कहने पर यह मुद्दा उठाया जा रहा है।

वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को “शर्मनाक” बताया और कहा कि इससे लोकतंत्र और आदिवासी सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाले लोग आहत हुए हैं।

हालांकि, बंगाल सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कार्यक्रम निजी तौर पर आयोजित किया गया था और इसमें राज्य सरकार की आधिकारिक भूमिका नहीं थी। सरकार का दावा है कि जिला प्रशासन की ओर से किसी प्रकार का प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ।

SCROLL FOR NEXT