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पाक-चीन से मुकाबले की तैयारी, 7.84 लाख करोड़ का रक्षा बजट

सरकार ने रविवार को 2026-27 के लिए रक्षा व्यय के रूप में 7,84,678 करोड़ रुपये आवंटित किए।

नई दिल्लीः चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से खतरों के मद्देनजर भारत अपनी रक्षा तैयारियों को हमेशा प्राथमिकता देता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज पेश आम बजट में भी यह दिखा है। सरकार ने रविवार को 2026-27 के लिए रक्षा व्यय के रूप में 7,84,678 करोड़ रुपये आवंटित किए, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 6,81,210 करोड़ रुपये आवंटित की गई थी। कुल पूंजीगत व्यय 2,19,306 करोड़ रुपये आंका गया है।

राजस्व व्यय 5,53,668 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें पेंशन के लिए 1,71,338 करोड़ रुपये शामिल हैं। पूंजीगत व्यय के तहत विमान और एयरो इंजन के लिए 63,733 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं, जबकि नौसेना बेड़े के लिए 25,023 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

फाइटर जेट पर खास जोर

सरकार ने 2025-26 में रक्षा बजट के लिए 6,81,210 रुपये आवंटित किए थे। पूंजीगत व्यय 1,80,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, जो संशोधित अनुमान चरण में बढ़कर 1,86,454 करोड़ रुपये हो गया। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने असैन्य, प्रशिक्षण और अन्य विमानों के निर्माण के लिए आवश्यक घटकों और पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत या नवीनीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क माफ करने की भी घोषणा की। इन दोनों फैसलों से रक्षा और अंतरिक्ष उद्योग को मदद मिलने की उम्मीद है।

बजट 2024-25 में क्या था?
बजट 2024-25 में रक्षा क्षेत्र के लिए 6,21,940 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था 18। इस तुलना से स्पष्ट है कि 2025-26 में रक्षा बजट में लगभग 9.5% की वृद्धि की गई है, जो सेना के आधुनिकीकरण की निरंतरता को दर्शाता है।

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