पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिश्नर रहे शांतनु सिन्हा बिस्वास की सेवाएं राज्य सरकार ने समाप्त कर दी हैं। उन्हें हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था।
बताया जा रहा है कि बिस्वास उन अधिकारियों में शामिल थे जिन्हें पिछली ममता बनर्जी सरकार के दौरान सेवा विस्तार दिया गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई और बिना इस्तीफे का मौका दिए ही उनका एक्सटेंशन खत्म कर दिया गया।
ED ने गिरफ्तारी से पहले उनसे करीब 10 घंटे तक पूछताछ की थी। जांच के दौरान एक फरार अपराधी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ ‘सोना पप्पू’ और रियल एस्टेट कारोबारी जॉय कामदार का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि इन लोगों का एक सिंडिकेट विवादित जमीनों को सस्ते में कब्जाने और बाद में ऊंचे दाम पर बेचने का काम करता था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस गिरोह में पुलिस के कुछ अधिकारी भी शामिल थे, जो फर्जी FIR दर्ज कर असली जमीन मालिकों पर दबाव बनाते थे। इस मामले में अब कोलकाता पुलिस के 12 अन्य कर्मियों की भी जांच की जा रही है, जिनमें ज्यादातर इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल हैं।
मामले ने राज्य की पुलिस व्यवस्था और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आगे और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।