पुलिस के मुताबिक तीनों अभिुक्त हिमांशु भाऊ गैंग से हैं 
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हिमांशु भाऊ गिरोह से पुलिस की मुठभेड़, दो शूटर घायल

दिल्ली के रोहिणी में देर रात हुई मुठभेड़

नयी दिल्ली : दिल्ली के रोहिणी इलाके में मंगलवार देर रात पुलिस और कुख्यात अपराधी हिमांशु भाऊ गिरोह से कथित रूप से जुड़े संदिग्ध शूटरों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ में गिरोह से जुड़े बताए जा रहे दो संदिग्ध शूटर गोली लगने से घायल हो गए। कार्रवाई के बाद पुलिस ने एक किशोर समेत कुल तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया।

पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई नरेला इलाके में हुई एक प्रॉपर्टी डीलर की हत्या की जांच के दौरान सामने आई जानकारी के आधार पर की गई। पुलिस को संदेह है कि मुठभेड़ में पकड़े गए संदिग्ध इस हत्या में कथित तौर पर शामिल थे।

नरेला में प्रॉपर्टी डीलर की हत्या

पुलिस सूत्रों ने बताया कि संदिग्धों की कथित संलिप्तता नरेला में प्रमोद नामक एक प्रॉपर्टी डीलर की हत्या में सामने आई है। हत्या के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की पहचान और उनके ठिकानों का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी थी।

प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि प्रॉपर्टी डीलर की हत्या के पीछे रंगदारी से जुड़ा विवाद हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, संदेह है कि रंगदारी की मांग पूरी नहीं करने के कारण प्रमोद को निशाना बनाया गया। हालांकि हत्या के वास्तविक कारण और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

हत्या के बाद संदिग्धों की तलाश

हत्या की घटना के बाद पुलिस टीम संदिग्धों का सुराग लगाने में जुटी थी। जांच के दौरान पुलिस ने संभावित आरोपियों की गतिविधियों और उनके ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाई।

इसी दौरान रोहिणी जिला पुलिस के विशेष स्टाफ को संदिग्धों की मौजूदगी के संबंध में एक सटीक सूचना मिली। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने रोहिणी इलाके में संदिग्धों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

सटीक सूचना के आधार पर घेराबंदी

पुलिस सूत्रों के अनुसार, विशेष स्टाफ की टीम ने संदिग्धों की संभावित मौजूदगी वाले इलाके में निगरानी शुरू की। पुलिस को जब संदिग्धों की गतिविधि का पता चला तो उन्हें रोकने और पकड़ने का प्रयास किया गया। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान संदिग्धों ने कथित तौर पर पुलिस टीम पर गोलीबारी शुरू कर दी। जवाब में पुलिसकर्मियों ने भी गोली चलाई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई।

दोनों तरफ से चलीं 10 से अधिक गोलियां

मुठभेड़ के दौरान दोनों तरफ से 10 से ज्यादा गोलियां चलने की बात सामने आई है। गोलीबारी के दौरान दो संदिग्धों के पैरों में गोली लगी।

पुलिस सूत्रों ने घायल संदिग्धों की पहचान दीपक पहलवान और नितिक के रूप में की है। दोनों को गोली लगने के बाद तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार कराया जा रहा है।

पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरोह से कथित रूप से जुड़े एक किशोर को भी पकड़ लिया। उसकी उम्र को देखते हुए उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई किशोर न्याय कानून के तहत की जाएगी।

दीपक पहलवान और नितिक घायल

मुठभेड़ में घायल दोनों संदिग्धों को पैरों में गोली लगी है। पुलिस ने उनकी पहचान दीपक पहलवान और नितिक के तौर पर की है। दोनों को पुलिस की निगरानी में अस्पताल पहुंचाया गया।

अब पुलिस अस्पताल में इलाज के साथ-साथ मामले की जांच भी आगे बढ़ा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों संदिग्धों की भूमिका प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद की हत्या में वास्तव में क्या थी और हत्या की योजना में उनके साथ कौन-कौन लोग शामिल थे।

किशोर की भूमिका की भी जांच

मामले में एक किशोर को भी पकड़ा गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह हत्या और कथित रंगदारी की पूरी साजिश में किस भूमिका में था।

किशोर की उम्र के कारण उसके साथ सामान्य वयस्क आरोपियों जैसी कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी। जांच में उसकी भूमिका स्पष्ट होने के बाद संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

रंगदारी के एंगल पर जांच

पुलिस को प्रारंभिक तौर पर संदेह है कि रंगदारी नहीं देने के कारण प्रॉपर्टी डीलर की हत्या की गई। दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय आपराधिक गिरोहों द्वारा कारोबारियों और संपत्ति से जुड़े लोगों से रंगदारी मांगने के मामलों को देखते हुए पुलिस इस पहलू को गंभीरता से जांच रही है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रमोद से कितनी रकम की रंगदारी मांगी गई थी, मांग किस माध्यम से की गई थी और कथित तौर पर रकम नहीं मिलने के बाद हत्या की योजना कैसे बनाई गई। इन सवालों के जवाब जांच के आगे बढ़ने पर सामने आने की उम्मीद है।

हिमांशु भाऊ गिरोह से कनेक्शन की जांच

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि पकड़े गए संदिग्धों का हिमांशु भाऊ गिरोह से वास्तविक संबंध कितना गहरा है। केवल गिरोह से कथित जुड़ाव के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि हत्या का पूरा संचालन इसी गिरोह ने किया था। पुलिस को यह स्थापित करना होगा कि संदिग्धों का गिरोह से किस प्रकार का संपर्क था और हत्या के पीछे किसी संगठित आपराधिक नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि संदिग्धों को हत्या के लिए किसने निर्देश दिए, हथियार किसने उपलब्ध कराए और हत्या के बाद उन्हें किसने शरण या अन्य सहायता दी।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती हत्या में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी है। पुलिस ने बताया कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी है।

जांच का दायरा केवल मुठभेड़ में पकड़े गए तीन संदिग्धों तक सीमित नहीं है। पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि क्या उनके पीछे कोई अन्य व्यक्ति या गिरोह का सदस्य था जिसने हत्या की साजिश तैयार की या उन्हें निर्देशित किया।

हत्या और मुठभेड़ को जोड़कर जांच

पुलिस अब दो स्तरों पर मामले की जांच कर रही है। पहला, नरेला में प्रॉपर्टी डीलर की हत्या की पूरी परिस्थितियों का पता लगाना और दूसरा, हत्या के बाद फरार हुए संदिग्धों तक पहुंचना।

मुठभेड़ में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस हत्या के मकसद, साजिश, हथियारों के स्रोत, अन्य सहयोगियों और कथित गिरोह कनेक्शन की जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी।

हथियार और आपराधिक नेटवर्क पर भी नजर

मुठभेड़ के बाद पुलिस की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संदिग्धों के पास कौन से हथियार थे और उनका इस्तेमाल पहले किसी अन्य वारदात में तो नहीं किया गया। यदि हथियार बरामद होते हैं तो उन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा सकता है और पूर्व मामलों से उनका मिलान किया जा सकता है।

इसके अलावा पुलिस संदिग्धों के मोबाइल फोन, संपर्कों और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े अन्य डिजिटल या वित्तीय सुरागों की भी जांच कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हत्या से पहले और बाद में वे किन लोगों के संपर्क में थे।

रोहिणी जिला पुलिस की कार्रवाई

पूरी कार्रवाई में रोहिणी जिला पुलिस के विशेष स्टाफ की भूमिका सामने आई है। हत्या के बाद संदिग्धों का पता लगाने के लिए टीम ने सूचना तंत्र और निगरानी के आधार पर कार्रवाई की।

पुलिस के लिए यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नरेला में हुई हत्या के आरोपियों तक पहुंचने के बाद अब मामले के कथित आपराधिक नेटवर्क का पता लगाने का अवसर मिला है।

जांच से सामने आएगा असली मकसद

फिलहाल पुलिस ने रंगदारी को हत्या की संभावित वजह माना है, लेकिन अंतिम मकसद अभी जांच का विषय है। पुलिस यह भी देख रही है कि कहीं हत्या के पीछे संपत्ति संबंधी विवाद, व्यक्तिगत दुश्मनी या कोई अन्य वित्तीय कारण तो नहीं था।

इसी तरह हिमांशु भाऊ गिरोह से संदिग्धों के संबंध और हत्या में गिरोह की कथित भूमिका भी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल तीन संदिग्ध पुलिस की पकड़ में

मुठभेड़ के बाद पुलिस के पास तीन संदिग्ध हैं- दीपक पहलवान, नितिक और एक किशोर। इनमें दीपक और नितिक गोली लगने के कारण अस्पताल में हैं, जबकि किशोर को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। पुलिस अब इनसे मिली जानकारी के आधार पर प्रॉपर्टी डीलर प्रमोद की हत्या की पूरी कड़ी जोड़ने और मामले में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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