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शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी ने की उर्सुला और लेयेन की मेजबानी

भारत और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता ऐतिहासिक व्यापार समझौते के लिए बातचीत के पूरा होने की मंगलवार को घोषणा करेंगे। दोनों पक्ष रणनीतिक रक्षा समझौते को अंतिम रूप देंगे।

Narendra Kumar Singh

नई दिल्लीः यूरोप और अमेरिका के बीच संबंधों में आई नई दरारों की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी की। भारत और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता ऐतिहासिक व्यापार समझौते के लिए बातचीत के पूरा होने की मंगलवार को घोषणा करेंगे। दोनों पक्ष रणनीतिक रक्षा समझौते को अंतिम रूप देंगे और भू-राजनीतिक उथल-पुथल एवं व्यापार व्यवधानों से निपटने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण पेश करेंगे।

शिखर सम्मेलन से पहले कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने राजघाट का दौरा किया और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने सोमवार को कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी। शिखर सम्मेलन से पहले वॉन डेर लेयेन ने कहा, ‘‘ एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध एवं सुरक्षित बनाता है। हम सभी को इसका लाभ मिलता है।’’

अमेरिका की व्यापार एवं सुरक्षा नीतियों के कारण दुनिया में नए भू-राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रहे हैं।

भारत-ईयू समझौता से मिलेंगे नए अवसर

बहुप्रतीक्षित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता एक अत्यधिक महत्वपूर्ण समझौता है जिसे ‘‘मदर ऑफ ऑल द डील्स’’ कहा जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों की समग्र दिशा में महत्वपूर्ण विस्तार होने की उम्मीद है क्योंकि यह विविध क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलेगा। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी (एसडीपी) दोनों पक्षों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने में सहायक होगी। यूरोपीय अधिकारियों ने पिछले सप्ताह कहा था कि यद्यपि दोनों पक्ष हर मुद्दे पर एकमत नहीं हैं। फिर भी उनके कुछ मूलभूत हित समान हैं जिनमें एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का होना शामिल है।

उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन भारत के साथ ‘‘ यूक्रेन के विरुद्ध रूस के आक्रामक युद्ध’’ पर चर्चा करने का भी अवसर होगा। अधिकारियों ने बताया कि अध्यक्ष कोस्टा इस संदेश को दोहराएंगे कि यह युद्ध यूरोप के लिए खतरा है और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक सीधी चुनौती है। साथ ही इसके हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी स्पष्ट परिणाम होंगे। भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं।

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