प्रतीकात्मक तस्वीर। 
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पेट्रोल सस्ता, डीजल पर एक्साइज खत्म

सरकार ने पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क 10-10 रुपये घटाया; ईंधन निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर

नई दिल्लीः सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस कदम से पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की बढ़ी वैश्विक कीमतों से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी गयी है।

बृहस्पतिवार देर रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार इसके साथ ही सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क लगा दिया है। सरकार ने डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया है।

पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे सरकारी खजाने पर सालाना 1.75 लाख करोड़ रुपये का राजस्व बोझ पड़ने का अनुमान है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रिफाइनरी कंपनियों के ‘अप्रत्याशित लाभ’ (विंडफॉल टैक्स) पर लगाम लगाने के लिए जुलाई 2022 में पहली बार यह कर लगाया गया था।

'अप्रत्याशित मुनाफा' उस अतिरिक्त लाभ को कहते हैं जो कंपनियों को बिना किसी निवेश या प्रयास के केवल वैश्विक परिस्थितियों के कारण अचानक मिलता है। इस कर को दिसंबर 2024 में हटा लिया गया था, जिसे अब दोबारा लागू किया गया है। हालांकि, पिछली बार के विपरीत ओएनजीसी जैसी घरेलू कच्चा तेल उत्पादक कंपनियों पर कोई अप्रत्याशित लाभ कर नहीं लगाया गया है।

उत्पाद शुल्क में इस कटौती के बाद पेट्रोल पर प्रभावी उत्पाद शुल्क 11.9 रुपये प्रति लीटर होगा (जिसमें 1.40 रुपये मूल उत्पाद शुल्क, 3 रुपये विशेष अतिरिक्त शुल्क, 2.50 रुपये कृषि उपकर और 5 रुपये सड़क बुनियादी ढांचा उपकर शामिल है)। वहीं, डीजल पर प्रभावी शुल्क 7.80 रुपये प्रति लीटर (1.80 रुपये मूल शुल्क, 4 रुपये कृषि उपकर और 2 रुपये सड़क उपकर) रह जाएगा।

सालाना 175 अरब लीटर ईंधन की बिक्री (115 अरब लीटर डीजल और 60 अरब लीटर पेट्रोल) को देखते हुए, इस शुल्क कटौती का राजकोषीय प्रभाव सालाना 1.75 लाख करोड़ रुपये होगा।

भारत में ईंधन विपणन कंपनियां दबाव में हैं क्योंकि अमेरिका एवं इजराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं।

सरकार के सामने दो विकल्प थे- या तो अंतरराष्ट्रीय बाजार की तरह भारत में भी कीमतें बढ़ाई जाएं, या फिर सरकारी खजाने पर बोझ लेकर लोगों को राहत दी जाए।

हरदीप पुरी ने क्या कहा

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 120 डॉलर के पार पहुंच गई हैं, जिसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल के दाम 20% से 50% तक बढ़ चुके हैं। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे- या तो अंतरराष्ट्रीय बाजार की तरह भारत में भी कीमतें बढ़ाई जाएं, या फिर सरकारी खजाने पर बोझ लेकर लोगों को राहत दी जाए। हरदीप पुरी ने लिखा, 'प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने दूसरा रास्ता चुना। इसके तहत सरकार ने टैक्स में कटौती कर तेल कंपनियों के घाटे को कम करने की कोशिश की है, जो इस समय पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। साथ ही सरकार ने एक और अहम कदम उठाते हुए पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर टैक्स भी लगाया है, ताकि घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके और कंपनियां केवल विदेशी बाजार से ज्यादा मुनाफा कमाने की ओर न झुकें।'

प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और लागत से बचाया जाए।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने क्या कहा

निर्मला सीतारमण ने भी लिखा, 'पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए, घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है। इससे उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से सुरक्षा मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और लागत से बचाया जाए। इसके अलावा, डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है। इससे घरेलू खपत के लिए इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इस संबंध में संसद को सूचित कर दिया गया है।'

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