मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य के सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों के लिए उच्च शिक्षा विभाग की नयी गाइडलाइन को लेकर बहस शुरू हो गई है। विभाग ने निर्देश जारी किया है कि यदि कोई शिक्षक देश के भीतर किसी कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप या मीटिंग में शामिल होना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। साथ ही, कार्यक्रम से लौटने के 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग ने यह निर्देश राज्य के सभी सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपलों को भेजा है। इस निर्देश पर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। वेस्ट बंगाल गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव देबाशीष सरकार ने कहा कि यह गाइडलाइन ‘वेस्ट बंगाल सर्विस रूल्स’ के खिलाफ है। उनके अनुसार सेवा नियमों में कहीं भी देश के भीतर कॉन्फ्रेंस या वर्कशॉप में शामिल होने के लिए पहले से अनुमति लेने का प्रावधान नहीं है।
नयी गाइडलाइन पर शिक्षकों ने उठाये सवाल
शिक्षकों का कहना है कि विदेश यात्रा के मामले में अनुमति लेने की व्यवस्था पहले से लागू है, जिसमें उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री की मंजूरी लेनी होती है, लेकिन देश के भीतर किसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए अनुमति लेनी अनावश्यक और गलत है। शिक्षकों के अनुसार, आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए वे ‘ऑन-ड्यूटी’ अवकाश लेते हैं और लौटने के बाद उच्च शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजते हैं। कई बार इस अवकाश की मंजूरी मिलने में डेढ़ साल तक लग जाता है, जिससे पहले से अनुमति की शर्त कई अवसरों को सीमित कर सकती है। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश मुख्य सचिव के कार्यालय से जारी किया गया है और उसे कॉलेजों को भेज दिया गया है।