संस्थान के गेट के सामने क्षोभ जताते रिटायर्ड कर्मचारी  
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बरानगर दिव्यांग अस्पताल के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बंद !

देशभर के सात केंद्रों के 1000 से अधिक पूर्व कर्मचारी प्रभावित, बरानगर में फूट पड़ा आक्रोश

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

बरानगर: एक ओर जहाँ देश में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश होने के बबाद गहमागहमी है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के अधीन आने वाले राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NILD) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आरोप है कि बरानगर के बनहुगली स्थित एनआईएलडी (NILD) शाखा के पूर्व कर्मचारियों को अचानक एक नोटिस मिला है, जिसमें सूचित किया गया है कि फरवरी माह से उनकी मासिक पेंशन बंद कर दी गई है। इस फरमान के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

अचानक आए नोटिस से मचा हड़कंप

उक्त संस्थान के पूर्व कर्मचारियों के अनुसार, 30 जनवरी की रात लगभग 10 बजे कर्मचारियों को यह आधिकारिक सूचना मिली कि अगले महीने से उनके खाते में पेंशन की राशि नहीं आएगी। यह खबर उन बुजुर्गों के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी, जो अपनी आजीविका और दवाइयों के खर्च के लिए पूरी तरह इसी पेंशन पर निर्भर हैं। बजट पेश होने के ठीक पहले आए इस फैसले ने केंद्र सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

देशव्यापी असर और प्रभावित कर्मचारी

एनआईएलडी (NILD) केंद्र सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्थान है, जिसकी पूरे भारत में कुल सात शाखाएँ कार्यरत हैं। पेंशन बंद होने का यह निर्णय केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर की सभी सात शाखाओं पर लागू हुआ है।

  • बरानगर शाखा: यहाँ लगभग 87 सेवानिवृत्त कर्मचारी इस निर्णय से सीधे प्रभावित हुए हैं।

  • राष्ट्रीय स्तर: पूरे भारत में संस्थान के 1000 से अधिक पूर्व कर्मचारियों की पेंशन पर रोक लग गई है।

अस्पताल में प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति

सोमवार की सुबह से ही बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारी बरानगर स्थित एनआईएलडी कार्यालय के सामने एकत्र हुए और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जीवन भर सेवा करने के बाद बुढ़ापे में उनसे उनका हक छीना जा रहा है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह आदेश तुरंत वापस नहीं लिया गया और उनकी पेंशन बहाल नहीं की गई, तो वे आने वाले दिनों में दिल्ली तक अपना आंदोलन ले जाएंगे और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संस्थान के अधिकारियों ने फिलहाल इस विषय पर कोई स्पष्ट तकनीकी कारण साझा नहीं किया है, जिससे भ्रम की स्थिति और बढ़ गई है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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