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वेस्ट बैंक में ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच बढ़ी हिंसा, फिलिस्तीनियों में डर

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले फिलिस्तीनियों का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ा खतरा जमीन पर मौजूद इज़राइली बसने वालों (सेटलर्स) से है।

Bishakhaa Tiwari

ईरान के खिलाफ इज़राइल और अमेरिका द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद वेस्ट बैंक में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इज़राइल की ओर दागी जा रही ईरानी मिसाइलें भले ही आसमान में दिखाई दे रही हों, लेकिन ग्रामीण इलाकों में रहने वाले फिलिस्तीनियों का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ा खतरा जमीन पर मौजूद इज़राइली बसने वालों (सेटलर्स) से है।

उत्तरी वेस्ट बैंक के डूमा गांव में रहने वाले 24 वर्षीय थाबेत का कहना है कि इस सप्ताह एक मिसाइल का मलबा उनके परिवार के करीब 100 साल पुराने घर से लगभग 20 मीटर दूर गिरा, लेकिन उन्हें उससे ज्यादा डर सेटलर्स से लगता है। उन्होंने कहा, “आसमान में मिसाइलें हैं, लेकिन हमारे दरवाजे पर सेटलर्स खड़े हैं। असली खतरा हमें उनसे और सेना से है।”

1967 के युद्ध के बाद कब्जे वाली जमीन पर बनाए गए इज़राइली सेटलमेंट्स में सायरन और बम शेल्टर जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद हैं। वहीं पास के फिलिस्तीनी गांवों को ऐसी कोई सुरक्षा सुविधा नहीं दी गई है। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार कब्जे वाली शक्ति होने के नाते इज़राइल पर वहां रहने वाली आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।

हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद वेस्ट बैंक के कई ग्रामीण इलाकों में फिलिस्तीनियों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगा दी गई हैं। इज़राइली अधिकारियों ने गांवों के बीच आवाजाही रोकने के लिए पर्चे बांटे हैं और कई जगहों पर गांवों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए हैं। कुछ नए गेट भी लगाए गए हैं ताकि अलग-अलग गांवों के बीच संपर्क कम हो सके।

इसी बीच सोशल मीडिया और सेटलर समूहों के चैट में फिलिस्तीनियों के खिलाफ भड़काऊ संदेश भी सामने आए हैं। एक पोस्ट में लोगों से कहा गया कि “मौका मत गंवाओ, दुश्मन को हराने और उसे देश से बाहर निकालने का समय आ गया है।”

हाल के दिनों में सेटलर्स द्वारा कई हमलों की खबरें सामने आई हैं। सोमवार को डूमा से करीब चार किलोमीटर दूर क़रयूत इलाके में सेटलर्स के एक समूह ने गोलीबारी कर दो फिलिस्तीनी भाइयों की हत्या कर दी। इस घटना का वीडियो भी सामने आया जिसमें सेटलर्स फिलिस्तीनी घरों की ओर गोलियां चलाते दिखाई दिए।

इसके अलावा कई बेदुइन समुदाय भी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इनमें खिरबत ऐन अर-रशाश से विस्थापित परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें अक्टूबर 2023 के हमलों के बाद अपने घर छोड़ने पड़े थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा युद्ध ने उनके हालात को और अधिक असुरक्षित बना दिया है।

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