श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिले पुंछ में नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट एक संवेदनशील सुरक्षा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय सेना ने मेंढर सेक्टर के नागरी टेकरी और सलोत्री क्षेत्र के अग्रिम सीमा इलाके में एक 14 वर्षीय पाकिस्तानी किशोर को हिरासत में लिया है। सेना के अनुसार, सीमा क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि देखे जाने के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए लड़के को सुरक्षा अभिरक्षा में लिया गया।
सैन्य अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए किशोर की पहचान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के टेट्रिनोट क्षेत्र निवासी मोहम्मद शरीफ के पुत्र जावेद अली के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में जावेद ने दावा किया कि वह अपने घर के पास बहने वाली नदी में नहाने गया था और पानी के बहाव तथा भौगोलिक स्थिति की जानकारी न होने के कारण अनजाने में नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंच गया। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां उसके इस बयान की गहन जांच कर रही हैं और घटना के सभी पहलुओं को सावधानीपूर्वक परखा जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लड़के के भारतीय क्षेत्र तक पहुंचने के मार्ग, उसकी गतिविधियों, पारिवारिक पृष्ठभूमि और अन्य परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अतीत में सीमा पार से घुसपैठ के प्रयासों के दौरान स्थानीय लोगों या नाबालिगों के इस्तेमाल की आशंकाएं भी सामने आती रही हैं। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में पूरी सतर्कता बरत रही हैं।
एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, यदि जांच में यह स्पष्ट हो जाता है कि किशोर अनजाने में सीमा पार कर आया है और उसके खिलाफ कोई संदिग्ध तथ्य नहीं मिलता, तो स्थापित सैन्य एवं कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत उसे पाकिस्तान को वापस सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
ऐसी स्थिति में दोनों देशों की सेनाओं के बीच फ्लैग मीटिंग आयोजित कर किशोर को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाने की कार्रवाई की जा सकती है। तब तक उसे कानूनी और प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत रखा जाएगा।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सुरक्षा एजेंसियां नियंत्रण रेखा के पार संभावित घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों को लेकर पहले से सतर्क हैं। खुफिया एजेंसियां सीमा क्षेत्र की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
पुंछ में पकड़े गए इस किशोर के मामले को भी इसी व्यापक सुरक्षा परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से अधिकारी बच रहे हैं।