नई दिल्लीः लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘‘बोलने की इजाजत नहीं देने’’ तथा कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ सदन में अनुचित स्थिति पैदा करने के आरोपों पर विपक्ष अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को सौंप सकता है।
सूत्रों ने बताया कि सोमवार शाम तक प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर 102 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए थे, हालांकि विपक्ष के एक प्रमुख दल तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। विपक्षी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के कई सांसदों के साथ ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
सूत्रों ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को सौंपा जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष को ‘‘बोलने की अनुमति नहीं दिए जाने’’, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सदन में की गई टिप्पणियों को लेकर उन पर कार्रवाई शुरू नहीं करने और कांग्रेस की महिला सांसदों पर बिना साक्ष्य के आरोप लगाये जाने के मामले में अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव के लिए नोटिस देने पर विचार किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि इस नोटिस पर अधिक से अधिक विपक्षी दलों के सांसदों के हस्ताक्षर लेने का प्रयास किया जा रहा है। इस मामले पर तृणमलू कांग्रेस के रुख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों ने बताया कि आज सुबह संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में हुई विपक्षी नेताओं की बैठक में, (लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ) अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार किया गया।
बैठक में तृणमूल कांग्रेस, वाम दल, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (उबाठा) और राकांपा (शप) सहित कुछ अन्य पार्टियों के नेताओं ने भी हिस्सा लिया। बीते दो फरवरी को, राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा विषय उठाने की अनुमति नहीं मिलने, सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने तथा अन्य मुद्दों पर सदन में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के लोगों को कुछ भी बोलने की छूट दी गई है।