नई दिल्ली : देश में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' (एक देश, एक चुनाव) लागू करने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस प्रस्ताव की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने उम्मीद जताई है कि आवश्यक कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया समय पर पूरी होने पर 2029 के लोकसभा चुनाव तक यह व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा मानसून सत्र में विधेयक पारित होने की संभावना कम है, क्योंकि समिति अभी व्यापक परामर्श की प्रक्रिया पूरी कर रही है। जेपीसी अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने कहा कि यदि संविधान संशोधन और अन्य आवश्यक कानून जुलाई 2028 तक भी पारित हो जाते हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव 'वन नेशन, वन इलेक्शन' व्यवस्था के तहत कराए जा सकते हैं। उनका कहना है कि समिति का उद्देश्य जल्दबाजी नहीं, बल्कि सभी पक्षों की राय लेकर मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है।
अभी जारी है राज्यों से व्यापक संवाद
समिति ने देश के कई राज्यों में जाकर राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं, कानूनी विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत की है। हालांकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और गोवा समेत कुछ राज्यों में अभी परामर्श होना बाकी है। इन्हीं बैठकों के बाद समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।
मानसून सत्र में रिपोर्ट आने की संभावना कम
सूत्रों के अनुसार जेपीसी अपनी रिपोर्ट आगामी मानसून सत्र में पेश नहीं कर पाएगी। समिति को परामर्श प्रक्रिया पूरी करने और सुझावों को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में रिपोर्ट संसद के अगले चरण में पेश किए जाने की संभावना
संविधान संशोधन होगा सबसे बड़ी चुनौती
'वन नेशन, वन इलेक्शन' लागू करने के लिए संविधान के कई प्रावधानों में संशोधन आवश्यक होगा। इसके अलावा लोकसभा और विधानसभाओं के कार्यकाल को एक समय-सीमा में लाने, सरकार गिरने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था और दल-बदल कानून में बदलाव जैसे मुद्दों पर भी स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने होंगे। समिति इन सभी पहलुओं पर विचार कर रही है।
क्या होंगे संभावित फायदे
समर्थकों का कहना है कि एक साथ चुनाव होने से बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता से राहत मिलेगी, सरकारी कामकाज में बाधा कम होगी और चुनावी खर्च में बड़ी बचत होगी। जेपीसी अध्यक्ष पहले भी कह चुके हैं कि इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है।
अंतिम रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
समिति सभी हितधारकों के सुझावों को शामिल करते हुए अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी। इसके बाद सरकार संसद में संविधान संशोधन विधेयक और संबंधित कानूनों को आगे बढ़ाएगी। यदि आवश्यक राजनीतिक और संसदीय समर्थन मिला, तो 2029 के आम चुनाव से पहले 'वन नेशन, वन इलेक्शन' लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा सकते हैं।