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AI से बदलेगी भारत की खेती : कोलकाता में ‘कृषि में एआई’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला

एग्री एक्सीलेंस हैकाथॉन 2026 का शुभारंभ

कोलकाता : भारत की कृषि को स्मार्ट और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक), कोलकाता और आईसीएआर–नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑन इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईसीएआर-एनआरआईआईपीएम), नई दिल्ली ने “कृषि में एआई: भारत के कृषि परिदृश्य का रूपांतरण” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।

यह कार्यशाला इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की आधिकारिक प्री-समिट गतिविधि के रूप में 9 जनवरी को एसटीपीआई, कोलकाता में संपन्न हुई। कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका और इसके माध्यम से टिकाऊ, डेटा-आधारित तथा जलवायु-सहिष्णु खेती को बढ़ावा देने पर व्यापक मंथन हुआ।

उद्घाटन सत्र में MeitY के संयुक्त सचिव श्री सुदीप श्रीवास्तव सहित सी-डैक, आईसीएआर और एनएसआईसी के वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने शिरकत की। इस अवसर पर ‘एग्री एक्सीलेंस हैकाथॉन 2026’ का भी शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य भारत की विविध कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप स्वदेशी एआई समाधानों को प्रोत्साहित करना है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में मृदा स्वास्थ्य निगरानी, डिजिटल सॉयल मैपिंग, फसल रोग एवं कीट पहचान, उपज पूर्वानुमान, स्मार्ट कृषि यंत्रीकरण तथा पशुपालन, पोल्ट्री और मत्स्य क्षेत्र में एआई अनुप्रयोगों पर प्रस्तुतियाँ दी गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि एआई तकनीकें किसानों को सटीक निर्णय लेने में सक्षम बनाकर लागत घटाने और उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

पैनल चर्चाओं में कृषि डेटा सुरक्षा, ट्रेसबिलिटी और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया, ताकि भरोसेमंद और नीति-अनुकूल डिजिटल कृषि मूल्य शृंखलाओं का निर्माण किया जा सके। साथ ही, सी-डैक द्वारा विकसित स्वदेशी एआई समाधानों का प्रदर्शन भी किया गया, जो छोटे और सीमांत किसानों के लिए व्यावहारिक उपयोग को दर्शाते हैं।

कार्यक्रम के समापन पर विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि एआई भारतीय कृषि के भविष्य की रीढ़ बनेगा और तकनीक-आधारित नवाचार के माध्यम से किसानों की आय, उत्पादकता और सतत ग्रामीण विकास को नई दिशा देगा।

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