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तेल की कीमत नई ऊंचाई पर

ईरान के साथ युद्ध को लेकर चिंताओं के कारण तेल की कीमतें फिर बढ़कर 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं और दुनिया भर के शेयर बाजार में गिरावट आई।

न्यूयॉर्कः ईरान के साथ युद्ध को लेकर चिंताओं के कारण तेल की कीमतें फिर बढ़कर 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं और दुनिया भर के शेयर बाजार में गिरावट आई।

स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) 500 बृहस्पतिवार को 1.5 प्रतिशत गिर गया और कुछ दिन की अपेक्षाकृत शांति के बाद इसमें फिर बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 1.6 प्रतिशत लुढ़क गया और नैस्डैक कंपोजिट 1.8 प्रतिशत टूट गया। इस गिरावट का कारण तेल बाजार रहा, जहां ‘ब्रेंट क्रूड’ के एक बैरल का दाम 101.59 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।

इधर तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने अन्य देशों को इस समय समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद की अस्थायी अनुमति दिए जाने की घोषणा की है। ईरान के खिलाफ अमेरिका एवं इजराइल के युद्ध के जल्द समाप्त होने के तत्काल कोई संकेत नहीं मिलने के बीच यह घोषणा की गई है। अमेरिका ने इससे पहले भारत को भी प्रतिबंधों से इसी तरह की ‘‘छूट’’ दी थी ताकि वह रूसी तेल खरीद सके। यह कदम 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से बढ़ रही तेल कीमतों को कम करने के प्रयासों के तहत उठाया गया।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक ‘पोस्ट’ में कहा, ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए निर्णायक कदम उठा रहे हैं और हम आतंकवादी ईरानी शासन से उत्पन्न खतरे एवं अस्थिरता से निपटते हुए कीमतों को कम रखने की दिशा में काम कर रहे हैं।’’

अमेरिका ने पांच मार्च को भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की ‘‘छूट’’ दी थी। इससे पहले उसने रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। बेसेंट ने कहा, ‘‘मौजूदा आपूर्ति की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय यह अस्थायी अनुमति दे रहा है ताकि देश इस समय समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकें।’’ उन्होंने कहा कि कम अवधि के लिए और सीमित रूप से उठाया गया यह कदम केवल उस तेल पर लागू होगा जो पहले से परिवहन में है और इससे रूस सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि उसकी ऊर्जा आय का अधिकतर हिस्सा उत्पादन के बिंदु पर लगाए जाने वाले करों से आता है।

बेसेंट ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप की ऊर्जा समर्थक नीतियों ने अमेरिका के तेल और गैस उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाया है जिससे अमेरिकियों के लिए ईंधन की कीमतें कम हुई हैं। तेल कीमतों में अस्थायी वृद्धि अल्पकालिक और अस्थायी व्यवधान है, जिससे लंबे समय में हमारे देश और अर्थव्यवस्था को भारी लाभ होगा।’’

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