वॉशिंगटन/तेहरान : United States Central Command (CENTCOM) द्वारा ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
CENTCOM ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों पर नाकेबंदी लागू की जाएगी। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच आवाजाही करने वाले जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 7.3% बढ़कर 102.16 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 8.4% उछलकर 104.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
Donald Trump ने चेतावनी दी है कि इस कदम का असर लंबे समय तक रह सकता है और नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं।
ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Qalibaf ने अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा कि जल्द ही अमेरिकी नागरिकों को महंगे ईंधन की आदत डालनी होगी।
वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज के पास आने वाले किसी भी सैन्य जहाज को कड़ा जवाब दिया जाएगा।
तनाव के बावजूद कुछ सुपरटैंकर हाल ही में जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं, लेकिन नाकेबंदी लागू होने के बाद शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट का असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस पर निर्भर हैं।
Narendra Modi ने संसद में संकेत दिया है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते चुनौतीपूर्ण स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। हालांकि, सरकार ने फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार किया है और एलपीजी की कोई कमी नहीं होने की बात कही है, लेकिन सप्लाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।