ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब अपने सबसे भीषण दौर में पहुंच गया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत 83वें चरण के हमले शुरू करते हुए इजराइल के अहम ठिकानों और खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स के जरिए इजराइल के अशदोद स्थित तेल डिपो पर हमला किया, जिससे वहां आग लग गई। इसके साथ ही कई सैन्य ठिकानों पर भी सटीक हमलों का दावा किया गया है।
हमले का दायरा यहीं नहीं रुका। अमेरिका के कुवैत और बहरीन स्थित एयरबेस भी ईरान के निशाने पर आए। कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस और बहरीन के शेख ईसा बेस पर मिसाइल हमलों की खबर है, जहां जेट फ्यूल टैंक और सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा यूएई के अल-धाफरा बेस पर भी ड्रोन हमले किए गए।
बताया जा रहा है कि यह पूरा हमला ईरान के नौसेना प्रमुख अलीरेजा तंगसिरी की मौत का बदला है, जिनकी हाल ही में इजराइली हमले में मौत हुई थी। इससे पहले 28 फरवरी 2026 को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद से ही क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हालांकि अमेरिका ने 6 अप्रैल तक तेल डिपो पर हमले रोकने की बात कही थी, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं।