निर्धारित समय में प्रक्रिया पूरी करने का सवाल
जितेंद्र, सन्मार्ग संवाददाता
नई दिल्ली/कोलकाता : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहाना के बेंच ने तृणमूल कांग्रेस के बीस बागी सांसदों को नोटिस दी जाने का आदेश दिया है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव व लोकसभा में नेता अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में एसएलपी दायर की है। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सवाल निर्धारित समय में प्रक्रिया को पूरी करने का है।
मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की तरफ से दायर पिटीशन के आधार पर स्पीकर ने बीस सांसदों को नोटिस दी जाने का आदेश दिया है। एडवोकेट अमृता पांडे ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के पिटीशन में उन्हें दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की अपील की गई है। इसके जवाब में जस्टिस बागची ने तुषार मेहता से कहा कि सिर्फ नोटिस देना ही नहीं बल्कि प्रक्रिया को समय में पूरा करना ज्यादा आवश्यक है। बेंच ने जब नोटिस दी जाने का मन बनाया तो सालिसिटर जनरल ने कहा कि स्पीकर और उनके कार्यालय को नोटिस नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वे स्पीकर की तरफ से इस मामले में बहस करेंगे। सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी की तरफ से पैरवी की। इस मामले में दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जाने में हो रही देर को चुनौती दी गई है। तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीते बीस सांसदों ने एनसीपीआई नामक एक पार्टी से अपने आप को जोड़ लिया है। इसने एक अलग गुट की हैसियत से स्वीकृति देने के लिए अपील की है। पिटीशन में कहा गया है कि उनकी जीत तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर हुई थी, इसलिए उनके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जाए। इस एसएलपी में स्पीकर और लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल को भी पार्टी बनाया गया है।