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पूर्वोत्तर के राज्यों में जीएसटी संग्रह में हुई उल्लेखनीय वृद्धि

असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में बढ़ा कर संग्रह असम एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, जहां से पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ वस्तुओं की आवाजाही होती है

Krishna Das Parth

नई दिल्ली-असम-मणिपुर : देश में सितंबर के दौरान सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह सालाना आधार पर 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। इस वृद्धि के बीच पूर्वोत्तर के राज्यों असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भी कर संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों, व्यापार और खपत का विस्तार हो रहा है। हालांकि, इन राज्यों में जीएसटी संग्रह की अलग-अलग वृद्धि दर के आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में सकल जीएसटी संग्रह 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि की तुलना में इसमें 14.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। घरेलू खपत और आयात से प्राप्त राजस्व में बढ़ोतरी ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेषज्ञों के मुताबिक, देश के विभिन्न राज्यों में कर संग्रह में बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। ईवाई इंडिया के कर भागीदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि जीएसटी संग्रह में वृद्धि का दायरा व्यापक रहा है। उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और कर्नाटक में संग्रह 16 से 18 प्रतिशत तक बढ़ा है। वहीं, असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उनके अनुसार, यह देशभर में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का संकेत देता है। पूर्वोत्तर के संदर्भ में जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी राज्य के भीतर वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री, कारोबारी लेनदेन तथा दूसरे राज्यों और विदेशों से होने वाले व्यापार की गतिविधियों से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, किसी राज्य में कर संग्रह बढ़ने के पीछे किन क्षेत्रों का योगदान सबसे अधिक रहा, इसे समझने के लिए क्षेत्रवार आंकड़ों की जरूरत होगी।

घरेलू खपत से 1.38 लाख करोड़ रुपये का राजस्व

सितंबर में घरेलू गतिविधियों से सकल जीएसटी संग्रह 10.1 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, आयात से प्राप्त राजस्व 26 प्रतिशत बढ़कर 65,525 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आयात से होने वाले राजस्व में तेज वृद्धि ने कुल जीएसटी संग्रह को बढ़ाने में अहम योगदान दिया। पूर्वोत्तर के लिए घरेलू खपत और आयात से जुड़े आंकड़े विशेष महत्व रखते हैं। असम क्षेत्र का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, जहां से पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के साथ वस्तुओं की आवाजाही होती है। वहीं, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड जैसे राज्यों में भी व्यापारिक गतिविधियां, निर्माण, परिवहन और उपभोक्ता वस्तुओं की मांग कर संग्रह को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इन क्षेत्रों के अलग-अलग योगदान का आकलन नहीं किया जा सकता।

चालू वित्त वर्ष में तीसरी बार दो लाख करोड़ के पार संग्रह

चालू वित्त वर्ष में यह तीसरा महीना है, जब देश का सकल जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है। इससे पहले अप्रैल में संग्रह करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये और जुलाई में 2.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान सकल जीएसटी संग्रह 11.6 प्रतिशत बढ़कर 12.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इस अवधि में रिफंड समायोजित करने के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह 10.4 प्रतिशत बढ़कर 10.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।

रिफंड में गिरावट पर भी उठे सवाल

सितंबर में जीएसटी रिफंड तीन प्रतिशत घटकर 27,001 करोड़ रुपये रहा। इसके बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह 18.1 प्रतिशत बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के भागीदार विवेक जालान ने कहा कि संग्रह में वृद्धि विनिर्माण और खपत की मजबूती को दर्शाती है। हालांकि, रिफंड में कमी के कारण कारोबारियों की नकदी उपलब्धता पर पड़ने वाले प्रभाव की निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में बड़ी कटौती के बावजूद संग्रह मजबूत बना हुआ है। हालांकि, सितंबर 2025 में जीएसटी दरों के युक्तिकरण की घोषणा और उनके लागू होने के बीच उपभोक्ताओं ने खरीदारी टाली थी। इस कारण मौजूदा आंकड़ों की तुलना पिछले वर्ष के अपेक्षाकृत कमजोर आधार से भी प्रभावित हो सकती है।

आयात और विनिमय दर का भी असर

ग्रांट थॉर्नटन भारत के भागीदार और कर विवाद प्रबंधन प्रमुख मनोज मिश्रा के अनुसार, सितंबर में आयात आधारित जीएसटी संग्रह में 25.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू जीएसटी संग्रह में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि रुपये की विनिमय दर, जिंस कीमतों और आयात गतिविधियों का संयुक्त प्रभाव इस वृद्धि में दिखाई देता है। मिश्रा के अनुसार, रुपये में गिरावट से डॉलर में मूल्यांकित आयात का रुपये में मूल्य बढ़ सकता है। इसके अलावा, कच्चे तेल और अन्य जिंसों की ऊंची कीमतों से आयात बिल बढ़ने पर जीएसटी संग्रह का आधार भी बढ़ता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, सोना और उर्वरक जैसी अधिक मूल्य वाली वस्तुओं के आयात ने भी संग्रह को बढ़ाने में भूमिका निभाई। जीएसटी परिषद की अगली बैठक सात अक्टूबर को प्रस्तावित है। आने वाले महीनों में कर संग्रह की दिशा वैश्विक जिंस कीमतों, रुपये की विनिमय दर, आयात की मात्रा और घरेलू मांग पर निर्भर करेगी। पूर्वोत्तर के राज्यों में जीएसटी संग्रह की वृद्धि को बेहतर ढंग से समझने के लिए आने वाले समय में राज्यवार और क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

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