सन्मार्ग संवाददाता
बैरकपुर : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बावजूद उत्तर 24 परगना जिला परिषद पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा बरकरार है। जिला परिषद के अध्यक्ष नारायण गोस्वामी को पद से हटाने के लिए भाजपा के बैरकपुर खेमे की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश किए जाने की खबर है। सूत्रों के मुताबिक, इस सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस के एक धड़े के कुछ सदस्यों से संपर्क किया गया था। उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में हस्ताक्षर करने के लिए तैयार करने की कोशिश हुई। बताया जा रहा है कि इस पहल के तहत करीब 23 सदस्यों के हस्ताक्षर भी जुटा लिए गए थे। हालांकि, बारासात सांगठनिक जिला भाजपा के विरोध के बाद प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की कोशिश फिलहाल रोक दी गई।
दरअसल, 66 सदस्यों वाली जिला परिषद में अविश्वास प्रस्ताव पारित कराने के लिए कम से कम 34 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। इस बीच प्रस्ताव को लेकर जिला परिषद भवन के बाहर कुछ लोगों के जुटने से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। वहां बारासात जिला भाजपा के सचिव राजा साहनी भी मौजूद थे। हालांकि, उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी में भाजपा की किसी भूमिका से इनकार किया।
राजा साहनी ने कहा, "मैं अपने निजी काम से जिला परिषद आया था। मेरा काम हो गया था। कोलकाता में एक जुलूस था, इसलिए कुछ लोग मेरे साथ आए थे। मैं नहीं कह सकता कि कौन इकट्ठा हुआ था। जिला परिषद चलाने वालों में कोई अनबन हो सकती है। मैं तृणमूल के अंदरूनी मामलों के बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारी सरकार चाहती है कि जिला परिषद ठीक से चले। आज कुछ लोग आपसी परेशानी के बारे में बताने आए थे। मैंने उनसे बैठकर मामला सुलझाने को कहा। मैंने यह जानने की कोशिश भी नहीं की कि विवाद किस बात को लेकर है, क्योंकि इस मामले में दखल देने का मुझे कोई अधिकार नहीं है।"
गौरतलब है कि जिला परिषद को लेकर भाजपा के दो खेमों के बीच टकराव पहले भी सामने आता रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में नारायण गोस्वामी की कार पर अंडे फेंके गए थे और उनके खिलाफ 'चोर-चोर' के नारे लगाए गए थे। इसके कुछ ही दिनों बाद उनके घर में तोड़फोड़ की घटना में बाहरी लोगों के शामिल होने के आरोप लगे थे। इस घटना के अगले दिन भाजपा के दोनों खेमों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
सूत्रों का कहना है कि जिला परिषद में सत्ता समीकरण बदलने की इस कोशिश के पीछे भाजपा के बैरकपुर खेमे की रणनीति थी, लेकिन बारासात सांगठनिक जिला नेतृत्व की असहमति के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। इससे भाजपा के दोनों खेमों के बीच संगठनात्मक मतभेद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
दूसरी ओर, जिला परिषद अध्यक्ष नारायण गोस्वामी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा, "मैं आज कार्यालय नहीं गया था। इसलिए नहीं बता सकता कि वहां क्या हुआ।"