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छात्रों पर नहीं होगी सख्त कार्रवाई : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- छात्रों पर फिलहाल कोई दमनात्मक कार्रवाई न हो। CCTV और बॉडी कैमरा समेत सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश, 3 अगस्त को मुख्य सचिव और DGP होंगे तलब।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन पर बड़ा अंतरिम आदेश दिया। अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई दमनात्मक कार्रवाई (Coercive Action) न की जाए। साथ ही, जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्हें हिरासत में लिया गया है, उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।

हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है, लेकिन फिलहाल छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि जंतर-मंतर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज, पेलेट गन, आंसू गैस और इलेक्ट्रिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 20 और 21 का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) लगाए गए आरोप स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि छात्र आंदोलनों से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस संचार और पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों का कोई भी निजी या डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और पुलिस यह सुनिश्चित करे कि सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहें।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय करते हुए संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव (Chief Secretary) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

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