नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में दिल्ली पुलिस को बच्चा गैंग का भड़फोड़ करने में बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस ने बच्चों की तस्करी करने वाले एक अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए कथित तस्कर, बिचौलिए, खरीदार और एक अस्पताल के मालिक समेत 13 लोगों को गिरफ्तार करने के साथ ही पांच नवजात शिशुओं को बरामद किया है।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया कि पांच जून को पहाड़गंज में आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक छद्म ग्राहक भेजा गया जिसके बाद गिरोह का पर्दाफाश हुआ। पुलिस ने तीन आरोपियों, ज्योति उर्फ कमलेश (37), शालू (43) और ललित को तब पकड़ा, जब वे चार-पांच दिन के एक नवजात बच्चे को नकली ग्राहकों को कथित तौर पर बेचने की कोशिश कर रहे थे।
डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि बच्चे को मुक्त करा लिया गया और फर्जी ग्राहकों द्वारा अग्रिम भुगतान के तौर पर दिए गए 20,000 रुपये बरामद कर लिए गए। उन्होंने बताया कि इसके बाद, पुलिस ने पहाड़गंज थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया।
पुलिस ने कहा कि जांच से पता चला कि आरोपी एक बाल तस्करी गिरोह का हिस्सा हैं जो विभिन्न राज्यों से शिशुओं को लाते थे और उन्हें निःसंतान दंपतियों को लाखों रुपये में बेचते थे।
जांचकर्ताओं के अनुसार, ज्योति गिरोह की प्रमुख समन्वयक थी और बिचौलियों के माध्यम से नवजात शिशुओं को खरीदती थी। इसमें एक आरोपी सायबा भाई घमर उर्फ कालिया भी शामिल था, जो राजस्थान और गुजरात से शिशुओं को कथित रूप से लाता था।
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों द्वारा किए गए खुलासे के आधार पर, पुलिस ने बाद में एक निजी अस्पताल से जुड़ी स्वतंत्र प्रयोगशाला तकनीशियन प्रतिभा और एक चालक विपिन को गिरफ्तार कर लिया, जिसने शिशुओं और गिरोह के सदस्यों को लाने ले जाने में कथित तौर पर मदद की थी।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके पास से 2.92 लाख रुपये नकद बरामद किए, जो नवजात बच्चे को कथित तौर पर खरीदने के लिए थे। पुलिस ने बताया कि एक अन्य आरोपी गुरुग्राम की रहने वाली घरेलू सहायिका ओमवती कथित तौर पर बिचौलिये का काम करती थी और तस्करी गिरोह के लिए बच्चों का इंतज़ाम करती थी।
जांचकर्ताओं को बेगमपुर के हीरा मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के मालिक डॉ. विवेकी की भी कथित भूमिका का पता चला। जांचकर्ताओं के अनुसार वह तस्करी करके लाए गए बच्चों को अपने अस्पताल में रखकर गैर-कानूनी तरीके से उन्हें गोद दिलाने में मदद करता था।
जांचकर्ताओं के अनुसार इसके लिए वे प्रजनन संबंधी इलाज करवा रहे बेऔलाद जोड़ों में से संभावित खरीदारों की पहचान करता था और माता-पिता होने का सबूत दिखाने के लिए जाली मेडिकल और जन्म से जुड़े दस्तावेज तैयार करवाता था। पता चला कि यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में फैले तस्कर, ट्रांसपोर्टर, बिचौलिये और खरीदारों के नेटवर्क के जरिए काम करता था।