सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा ने हाल ही में 'पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटीज़ एंड कॉलेजेज़ (एडमिनिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) (अमेंडमेंट) बिल 2026' को 171 के मुकाबले 51 वोटों से मंजूरी दे दी है। इस विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री के भाषण में जादवपुर यूनिवर्सिटी का बार-बार जिक्र हुआ। मुख्यमंत्री ने परिसर में कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और "टुकड़े-टुकड़े गैंग" पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। विपक्षी विधायकों ने इस जल्दबाजी में लाए गए कानून के संभावित दुरुपयोग और प्रशासनिक मनमानी पर कड़ी चिंता जताई है।
कर्मचारियों के तबादले का नया प्रावधान
नए कानून के तहत 2017 के एक्ट में नई धारा 14-A जोड़ी गई है। इसके जरिए राज्य सरकार के परामर्श से चांसलर प्रशासनिक आधार पर किसी भी यूनिवर्सिटी के शिक्षक या नॉन-टीचिंग स्टाफ का तबादला दूसरी यूनिवर्सिटी में कर सकेंगे। सरकार का दावा है कि इसका उद्देश्य राज्य की पुरानी यूनिवर्सिटीज़ के अनुभवी संसाधनों को नई यूनिवर्सिटीज़ तक पहुंचाना है। हालांकि कर्मचारियों की वरिष्ठता और मूल अधिकारों की सुरक्षा के प्रावधान भी किए गए हैं, लेकिन विपक्ष इसे उच्च शिक्षा की स्वायत्तता पर सीधा हमला मान रहा है।