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नयी तकनीक ने माध्यमिक बोर्ड की परेशानियां बढ़ायीं

सन्मार्ग संवाददाता

हुगली : नई तकनीक ने पढ़ाई को आसान तो बनाया है, लेकिन साथ ही नकल के नए तरीके भी सामने ला दिए हैं। माध्यमिक परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और एआई टूल्स का इस्तेमाल बढ़ने से माध्यमिक शिक्षा परिषद की चिंता बढ़ गई है। राज्य के विभिन्न जिलों की तरह हुगली में भी परीक्षा केंद्रों में मोबाइल ले जाकर परीक्षा देने की घटनाएं सामने आई हैं। अब तक तीन मामले दर्ज किए गए हैं। चुंचुड़ा के एक नामी स्कूल में एक परीक्षार्थी मोबाइल के साथ पकड़ा गया, जिसके कारण उसकी परीक्षा रद्द कर दी गई। पहले दिन भी एक छात्र मोबाइल लेकर परीक्षा केंद्र में घुसा था, लेकिन परीक्षा शुरू न होने पर उसका मोबाइल जब्त कर उसे चेतावनी दी गई। शनिवार को एक छात्र मोबाइल से उत्तर खोजते हुए पकड़ा गया, वहीं भौतिक विज्ञान की परीक्षा में एक छात्रा भी मोबाइल के साथ रंगे हाथों पकड़ी गई। माध्यमिक शिक्षा परिषद के ज्वाइंट कन्वेनर शुभेंदु गड़ाई ने बताया कि परिषद की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का इस्तेमाल सख्त मना है। इसके बावजूद छात्र एआई और मोबाइल की मदद से तुरंत उत्तर पाने के लालच में जोखिम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिषद लगातार परीक्षा केंद्रों में निगरानी बढ़ा रही है और सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल कर सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि सभी केंद्रों पर सुरक्षा बल और कैमरे मौजूद होने के बावजूद ये घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। मोबाइल और एआई टूल्स का प्रयोग न केवल परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासनहीनता की प्रवृत्ति भी बढ़ा रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक को शिक्षा के लिए सही तरीके से उपयोग करना चाहिए, लेकिन एआई और मोबाइल जैसे उपकरणों का गलत इस्तेमाल छात्रों को केवल तात्कालिक लाभ देता है और उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता को कमजोर करता है। वे यह भी सुझा रहे हैं कि परीक्षा में डिजिटल निगरानी और सख्त नियमों के साथ-साथ छात्रों को एआई टूल्स का नैतिक और सही इस्तेमाल सिखाने पर भी जोर दिया जाए।

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, परिषद यह सुनिश्चित कर रही है कि परीक्षा निष्पक्ष, सुरक्षित और अनुशासित तरीके से संपन्न हो।

नई तकनीक ने शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाया है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल परीक्षा की विश्वसनीयता को चुनौती दे रहा है। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि तकनीक का प्रयोग सीखने में मददगार बने, न कि धोखाधड़ी में।

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