कोलकाता : भारत और इंडोनेशिया ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की वर्ष 1927 की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा के शताब्दी वर्ष के अवसर पर 'टैगोर-देवंतरा ईयर ऑफ कल्चरल एंड एजुकेशनल डिप्लोमेसी' मनाने की घोषणा की है। जुलाई 2026 से सितंबर 2027 तक चलने वाले इस 15 माह के विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, कला, सिनेमा और अकादमिक सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊंचाई देना है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इस पहल की औपचारिक घोषणा की गई। इस सांस्कृतिक वर्ष का नाम गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन के प्रणेता की हाजर देवंतरा के सम्मान में रखा गया है। दोनों महान शिक्षाविदों के विचारों में शिक्षा, सांस्कृतिक चेतना और मानवतावाद को लेकर उल्लेखनीय समानताएं रही हैं।
इस अवसर पर जकार्ता में टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा पर आधारित दुर्लभ तस्वीरों की प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही लेखक अरिंदम मुखर्जी की पुस्तक Rabindranath Tagore's Indonesian Odyssey: A Cultural Pilgrimage प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट की गई।
कार्यक्रम के अंतर्गत इंडोनेशिया फैशन वीक में शांतिनिकेतन की डिजाइनर पापरी बसाक भारतीय और इंडोनेशियाई बाटिक परंपराओं पर आधारित विशेष परिधानों का प्रदर्शन करेंगी। इसके अलावा टैगोर फिल्म फेस्टिवल, टैगोर-देवंतरा क्विज, संस्कृत अध्ययन कार्यक्रम, साहित्यिक संगोष्ठियां, भ्रमणशील फोटो प्रदर्शनी तथा 'बोर्सो बोरोन' बंगाली नववर्ष उत्सव सहित कई सांस्कृतिक आयोजन होंगे।
जनवरी 2027 में 'सरॉन्ग टू साड़ी' वस्त्र प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। साथ ही नालंदा विश्वविद्यालय और जांबी विश्वविद्यालय के बीच शैक्षिक सहयोग, अतिश दीपंकर की प्रतिमा की स्थापना, नालंदा कॉपर प्लेट्स की प्रतिकृति का आदान-प्रदान तथा भारत-इंडोनेशिया के संयुक्त स्मारक डाक टिकट जारी करने का भी प्रस्ताव है। इस सांस्कृतिक वर्ष का समापन सितंबर 2027 में बाली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय विद्वत सम्मेलन के साथ होगा, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने की पहल माना जा रहा है।