Nepal में हाल ही में हुए चुनावों ने देश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। रैपर से राजनेता बने Balendra Shah की पार्टी Rastriya Swatantra Party (आरएसपी) ने चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करते हुए पारंपरिक राजनीतिक दलों को कड़ी चुनौती दी है।
दरअसल, सितंबर 2025 में नेपाल में हजारों युवाओं ने सड़कों पर उतरकर देश के पुराने राजनीतिक ढांचे और नेताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन को कई लोगों ने “जेन-ज़ेड आंदोलन” या “क्रांति” तक बताया। इन प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री KP Sharma Oli को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
इसी आंदोलन के बाद हुए पहले चुनाव में आरएसपी एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है। शुरुआती रुझानों के अनुसार पार्टी 25 सीटें जीत चुकी है और 93 अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि देश की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था से बदलाव चाहती है।
वोटों की गिनती के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत आरएसपी को 61,399 में से 35,091 वोट मिले हैं, जो लगभग 57.2 प्रतिशत है।
हाल ही में Kathmandu के मेयर रहे बालेंद्र शाह ने Jhapa जिले की झापा-5 सीट पर भी बड़ी बढ़त बना ली है। यहां वे चार बार के प्रधानमंत्री और Communist Party of Nepal (Unified Marxist–Leninist) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली से काफी आगे चल रहे हैं। शाह को अब तक 15,000 से अधिक वोट मिले हैं, जबकि ओली को करीब 3,300 वोट प्राप्त हुए हैं।
नेपाल की संसद के निचले सदन में कुल 275 सीटें हैं। इनमें से 165 सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव यानी फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली से चुने जाते हैं, जबकि 110 सीटें अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत बाद में आवंटित की जाती हैं। मौजूदा रुझान नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं।