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जेयू में वंदे मातरम विवाद के बाद राष्ट्रवादी सम्मेलन

4 सितंबर पर टिकीं सबकी सियासी नजरें

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : जादवपुर यूनिवर्सिटी एक बार फिर वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष के केंद्र में है। 'वंदे मातरम' विवाद और कैंपस की दीवारों पर लिखे गए विवादास्पद नारों को लेकर हुए हंगामे के बाद, अब इसी वामपंथी गढ़ के भीतर एक राष्ट्रवादी सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। यूनिवर्सिटी के त्रिगुना सेन ऑडिटोरियम में 4 सितंबर को होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है। कैंपस का माहौल पिछले कुछ हफ्तों से अशांत रहा है। वामपंथी छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बीच झड़पों के बाद तनाव बढ़ गया था। स्थिति तब और गंभीर हुई जब दीवारों पर राष्ट्र-विरोधी नारे सामने आए, जिन्हें अधिकारियों ने बाद में मिटा दिया। सरकार ने भी कड़ा संदेश दिया कि परिसर में ऐसी गतिविधियां सहन नहीं की जाएंगी। इसी पृष्ठभूमि में, बीजेपी ने इस रेड बैस्टियन के भीतर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का फैसला किया है।

पढ़ाई प्रभावित, आम छात्र चिंतित

इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य, स्वपन दासगुप्ता और जिष्णु बसु प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे। आयोजकों का उद्देश्य कैंपस के भीतर राष्ट्रवादी विचारधारा को मंच देना है, जिससे वामपंथी प्रभाव को चुनौती दी जा सके। बीजेपी नेताओं का दावा है कि कैंपस में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को संरक्षण मिल रहा है। इस सम्मेलन के जरिए एक कड़ा संदेश देने की तैयारी है। दूसरी ओर, आम छात्रों का वर्ग चिंतित है कि इन राजनीतिक टकरावों से उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। इस आयोजन के बाद यूनिवर्सिटी परिसर का राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने की पूरी संभावना है।

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