कोलकाता : निर्वाचन आयोग द्वारा कराए गए मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) पर किए गए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि उत्तर कोलकाता की कुछ महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ (LD) श्रेणी में चिह्नित मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी उनकी जनसंख्या अनुपात से कहीं अधिक है।
यह अध्ययन सबर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं—अशिन चक्रवर्ती, सौप्तिक हलदर और सबीर अहमद—द्वारा किया गया है। अध्ययन के अनुसार, चौरंगी विधानसभा क्षेत्र में LD सूची में शामिल 17,545 मतदाताओं में से 12,579 मुस्लिम हैं, जो कुल का लगभग 71.7% है, जबकि 2011 की जनगणना के अनुसार यहां मुस्लिम आबादी लगभग 40% है।
इसी तरह एंटाली में LD श्रेणी में चिह्नित 25,957 मतदाताओं में से 18,760 मुस्लिम (करीब 72.3%) हैं, जबकि वहां मुस्लिम जनसंख्या का अनुपात लगभग 40% है। बेलगाछिया में 22,711 मतदाताओं में से 15,387 (67.8%) मुस्लिम बताए गए हैं, जबकि वहां मुस्लिम आबादी करीब 25% है। जोरासांको और कॉसिपोर-बेलगाछिया क्षेत्रों में भी LD सूची में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 56% बताई गई है, जबकि इन क्षेत्रों में मुस्लिम जनसंख्या लगभग 20% है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि ‘एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड/डुप्लिकेट’ (ASD) सूची में मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुरूप है। उदाहरण के तौर पर, चौरंगी में ASD सूची में 35.9% नाम मुस्लिमों के हैं, जो वहां की आबादी के अनुपात से मेल खाता है। जोरासांको में ASD सूची में 22.4% मुस्लिम नाम हैं, जो 20% जनसंख्या हिस्सेदारी के करीब है।
हालांकि, LD सूची में मुस्लिम मतदाताओं की अधिकता पर शोधकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। सबीर अहमद ने आरोप लगाया कि सूची के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब इन मतदाताओं को बड़ी संख्या में दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जिससे यह प्रक्रिया ‘एनआरसी’ जैसी प्रतीत होती है।
इस संबंध में निर्वाचन अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है