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मां उमा की कोलकाता यात्रा को जीवंत करेगा मुदियाली क्लब

जोड़ासांको से शोभाबाजार तक दिखेगी पुरानी परंपरा

Munmun Thakur

65 लाख में सजेगा विरासत की लोककथाओं का पंडाल

मुनमुन, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : कोलकाता और दुर्गा पूजा का मेल इतिहास की एक ऐसी बहती धारा है, जहां हर कोने में सदियों पुरानी कहानियां और किंवदंतियां जिंदा हैं। ये कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि मां दुर्गा कोई दूर की देवी नहीं, बल्कि हमारे ही घर की प्यारी बेटी उमा हैं, जो हर साल अपने मायके लौटती हैं। इसी स्नेह, कल्पना और अटूट आस्था की महक को इस साल मुदियाली क्लब अपनी पूजा के जरिए जीवंत करने जा रहा है। अपना 92वां वर्ष पूरा कर रहा यह ऐतिहासिक क्लब इस बार बेहद खास और अनोखे अंदाज में दर्शकों के सामने आ रहा है।

बेटी उमा के स्वागत की दिखेगी अनोखी परंपरा

हर साल की तरह इस साल भी मुदियाली क्लब ने कुछ अलग करने की कोशिश की है। इस थीम के माध्यम से यहां दर्शाया जाएगा कि जब मां दुर्गा कोलकाता आती हैं, तो वह जोड़ासांको में शिवकृष्ण डे के घर सजती-संवरती हैं, कुम्हारटोली में अभयचरण मित्रा के घर भोग ग्रहण करती हैं और शोभाबाजार राजबाड़ी में पूरी रात नृत्य प्रदर्शन देखती हैं। यह कोई पौराणिक ग्रंथ या पुजारियों की नियमावली का हिस्सा नहीं है, बल्कि पुराने कोलकाता की उन कुलीन परंपराओं से जुड़ी गाथा है जिन्हें पीढ़ियों से संजोया गया है। बंगालियों की अपनी बेटी के प्रति देखभाल और असीम प्रेम की भावना से ही ये किंवदंतियां जन्म लेती हैं और समय के साथ आगे बढ़ती जाती हैं।

65 लाख के बजट में सजेगी ओइतिह्येर लोककथा

इन भूली-बिसरी कहानियों और पुरानी संस्कृति को सहेजने के लिए ही इस साल मुदियाली क्लब की मुख्य थीम "ओइतिह्येर लोककथा" यानी विरासत की लोककथाएं तय की गई है। क्लब के सेक्रेटरी मनोज साहा ने बताया कि इस भव्य और ऐतिहासिक आयोजन का कुल बजट 65 लाख रुपये रखा गया है। इतने बड़े पैमाने पर होने वाले इस आयोजन में परंपरा और आधुनिकता का ऐसा बेजोड़ मेल देखने को मिलेगा, जो आने वाले दिनों में हर देखने वाले के मन में गहरी छाप छोड़ेगा। कोलकाता के इस प्रतिष्ठित पूजा पंडाल में मां उमा के स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं, जहां हर एक कोना बंगाल की समृद्ध संस्कृति की कहानी बयां करेगा।

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