सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने अंडमान के कॉलेजों के छात्रों द्वारा चलाए जा रहे शांतिपूर्ण आंदोलन को मजबूत समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि डीम्ड विश्वविद्यालय के खिलाफ उनका विरोध अनुशासित, संवैधानिक और न्यायसंगत रहा है। द्वीपवासियों और छात्र समुदाय को संबोधित एक वीडियो संदेश में सांसद ने कहा कि छात्र लगातार पांच दिनों से बिना आम जनता को असुविधा पहुंचाए, संपत्ति को नुकसान पहुंचाए या सड़क अवरुद्ध किए बिना प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी मांगें संविधान द्वारा प्रदत्त वास्तविक अधिकार हैं। सांसद ने कहा कि पूरे प्रक्रिया में बार-बार हुई प्रशासनिक चूक ने अंततः छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए विवश किया। उन्होंने टिप्पणी की कि पर्याप्त परामर्श के बिना बड़े शैक्षणिक बदलाव लागू करने के कारण उत्पन्न असंतोष की जिम्मेदारी प्रशासन पर है। पांडिचेरी विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के अचानक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सांसद ने कहा कि यह निर्णय उचित संवाद के बिना थोपे जाने जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने अधिकारियों से जल्दबाजी में निर्णय लागू न करने और छात्र समुदाय के साथ सार्थक संवाद करने की अपील की। सांसद ने घोषणा की कि वह 14 फरवरी 2026 को सुबह 9:30 बजे व्यक्तिगत रूप से धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों से सीधे बातचीत करेंगे, उनकी चिंताएं सुनेंगे और परामर्श के बाद आगे की कार्यवाही तय करेंगे। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि डीबीआरएआईटी कॉलेज के गेट कथित रूप से उस समय बंद कर दिए गए जब छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होना चाहते थे और इसे अनुचित बताया। कठिन मौसम और व्यक्तिगत असुविधाओं के बावजूद गरिमा बनाए रखने के लिए छात्रों की सराहना करते हुए उन्होंने उन्हें शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रखने और टकराव से बचने की सलाह दी। उन्होंने विभिन्न छात्र नेताओं, पार्षदों और समुदाय के सदस्यों को धन्यवाद दिया जिन्होंने एकजुटता दिखाई। राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रयासों का उल्लेख करते हुए सांसद ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री के समक्ष यह मुद्दा उठाया था और हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखित प्रतिनिधित्व सौंपकर डीम्ड विश्वविद्यालय प्रस्ताव पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से भी मुलाकात का प्रयास करने की बात कही ताकि विषय की गंभीरता से अवगत कराया जा सके और समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित हो। जिला अधिकारियों और पुलिस प्रशासन से अपील करते हुए सांसद ने कहा कि छात्रों को भयभीत नहीं किया जाना चाहिए तथा धरना स्थल के पास पुलिस उपस्थिति न्यूनतम रखी जाए। इसके स्थान पर प्रशासन से पेयजल और चिकित्सीय सहायता जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। उन्होंने छात्रों को सरल, ईमानदार और शांतिप्रिय बताते हुए कहा कि वे केवल अपने शैक्षणिक भविष्य की स्पष्टता चाहते हैं। अंत में सांसद ने आश्वासन दिया कि आगे के कदम सामूहिक परामर्श और जनमत के आधार पर ही उठाए जाएंगे।