सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, कोलकाता क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक कर द्वीपों में पेट्रोल, डीज़ल और घरेलू एवं वाणिज्यिक रसोई गैस की गंभीर कमी, अनियमित आपूर्ति तथा कई द्वीपों में ईंधन उपलब्ध न होने की समस्या पर चिंता व्यक्त की। बैठक में उन्होंने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने और आवश्यक ईंधन की निर्बाध आपूर्ति बहाल करने का आग्रह किया। सांसद ने बताया कि ईंधन संकट ने उपभोक्ताओं, जनप्रतिनिधियों, दूरस्थ द्वीपों की आबादी, होटलों, पर्यटन प्रतिष्ठानों तथा व्यावसायिक क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला पर्याप्त रूप से कार्य नहीं कर रही, जिसके कारण विशेषकर निकोबार समूह, उत्तर एवं मध्य अंडमान के द्वीपों में असुविधा और अनिश्चितता बढ़ी है। उन्होंने स्वराज द्वीप के लिए रसोई गैस परिवहन हेतु नियमित कार्गो जहाज और 10,000 सिलिंडर क्षमता का भंडारण गोदाम स्थापित करने की आवश्यकता बताई। लॉन्ग आईलैंड में 230 से अधिक रसोई गैस उपभोक्ताओं को आज भी उचित वितरण प्रणाली नहीं मिली है और उन्हें रिफिल के लिए रंगत जाना पड़ता है, जिसमें 1 से 2 दिन तक का समय लगता है। उन्होंने वहाँ स्थानीय या द्वार-से-द्वार वितरण प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त बेटापुर–बसंतपुर मार्ग पर पेट्रोल/डीजल आउटलेट न होने और लगातार मांग के बावजूद इस दिशा में कोई प्रगति न होने पर भी चिंता जताई। उत्तर और मध्य अंडमान में रसोई गैस की निर्भरता दक्षिण अंडमान से आपूर्ति पर होने के कारण यहाँ बार-बार कमी की समस्या बनी रहती है। उन्होंने मायाबंदर में केन्द्रीय रसोई गैस भंडारण गोदाम स्थापित करने, बराटांग सहित कदमतला तक अतिरिक्त डिपो विकसित करने और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता दोहराई। डिगलीपुर तहसील में एकमात्र रसोई गैस वितरक द्वारा 14 पंचायतों को सेवा देने में कठिनाई होती है। उन्होंने अतिरिक्त वितरक नियुक्त करने, केरलपुरम स्थित अनिड्को आउटलेट के समय में विस्तार करने और कलारा जंक्शन से डिगलीपुर के बीच नया आउटलेट खोलने का अनुरोध किया।
लिटिल अंडमान में 6,500 से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को अनियमित शिपिंग शेड्यूल के कारण रसोई गैस की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रति माह 6,000 से अधिक सिलिंडर का भंडारण, जहाज आवागमन में वृद्धि और पेट्रोल–डीजल की वास्तविक मांग के अनुरूप आपूर्ति पर बल दिया। जनजातीय द्वीपों—कार निकोबार, चौरा, तेरेसा, कच्चल और नानकौरी में 4–6 महीनों बाद पेट्रोल–डीजल और लगभग पाँच महीने बाद रसोई गैस पहुंचने की स्थिति पर भी सांसद ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को 12 के स्थान पर केवल 2–3 सिलिंडर ही मिल रहे हैं, और लंबी कतारें वितरण प्रणाली की बदहाली दर्शाती हैं। इन द्वीपों के लिए निर्धारित समयबद्ध ईंधन आपूर्ति योजना की तत्काल आवश्यकता बताई गई। सांसद ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, नए भंडारण और ईंधन आउटलेट स्थापित करने, कार्गो जहाजों की आवाजाही बढ़ाने, वितरण बाधाओं को दूर करने और पारदर्शी आपूर्ति शेड्यूल प्रकाशित करने का अनुरोध किया।