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अंडमान में जिला योजना समिति बैठकों को लेकर सांसद का प्रशासन पर हमला

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के सांसद बिष्णु पद रे ने जिला योजना समिति की बैठकों में हो रही लापरवाही और प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में प्रशासन की कार्यशैली पूरी तरह चरमरा गई है, जिसके कारण लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का मज़ाक बन रहा है। सांसद ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि दक्षिण अंडमान जिले में 22 से 24 सितंबर तक आयोजित होने वाली डीपीसी की बैठक को पंचायत प्रतिनिधियों को बहिष्कार करना पड़ा क्योंकि ड्राफ्ट योजना पुस्तिका 20 सितंबर को ही उपलब्ध कराई गई थी, जबकि नियमों के अनुसार इन्हें बैठक से 10 दिन पहले मिलना चाहिए था। इसके अलावा पिछली बैठक की एक्शन टेकन रिपोर्ट भी नहीं सौंपी गई। यही हाल उत्तर एवं मध्य अंडमान की बैठक का रहा, जहां योजना पुस्तिकाएं केवल एक दिन पहले वितरित की गईं। वहीं निकोबार जिले की बैठक 29–30 सितंबर को प्रस्तावित है, लेकिन अब तक न तो योजना पुस्तिकाएं दी गई हैं और न ही रिपोर्ट। सांसद ने याद दिलाया कि प्रशासन की 3 सितंबर 2002 की अधिसूचना के मुताबिक हर वर्ष जून तक मसौदा योजनाएं ज़िला परिषदों को सौंपनी होती हैं।

इसके बाद समय पर नोटिस जारी कर अक्टूबर तक अंतिम योजना को उपराज्यपाल को अनुमोदन के लिए भेजा जाना चाहिए। लेकिन इन नियमों को लगातार नज़रअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 12 अगस्त को हुई समन्वय बैठक में मुख्य सचिव ने 31 अगस्त तक सभी डीपीसी बैठकों को पूरा करने का निर्देश दिया था और 24 जुलाई व 14 अगस्त को योजना विभाग ने भी परिपत्र जारी किए थे। इसके बावजूद विभागीय सचिवों और विभिन्न प्रमुख अधिकारियों ने पालन नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल की ओर से भी कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जिससे प्रशासनिक नेतृत्व और पर्यवेक्षण की पूरी तरह विफलता उजागर हुई है। उन्होंने कहा कि यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि द्वीपवासियों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने और केंद्र सरकार की छवि को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास है। उन्होंने चेतावनी दी कि दक्षिण अंडमान डीपीसी का बहिष्कार पंचायत प्रतिनिधियों की मजबूरी थी क्योंकि बार-बार नियमों का उल्लंघन हो रहा है और चर्चा के लिए पर्याप्त समय तक नहीं दिया जा रहा।

सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से तुरंत हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि डीपीसी बैठकों को नियमों के अनुसार समयबद्ध ढंग से आयोजित किया जाए बजट प्रस्तावों की समयसीमा बढ़ाई जाए और दोषी अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि इन पिछड़े द्वीपों के लोग पूरी तरह सरकारी सहयोग पर निर्भर हैं और प्रशासन की उदासीनता से उनकी उम्मीदें टूट रही हैं। विधानसभा के अभाव में प्रशासन पर कड़ी निगरानी और नियमित समीक्षा जरूरी है ताकि द्वीपवासियों के अधिकार और हित सुरक्षित रह सकें।

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