नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सभी नागरिकों से पश्चिम एशिया में जारी ‘‘भीषण युद्ध’’ के कारण पैदा हुई ‘‘चुनौतीपूर्ण’’ स्थिति से पार पाने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। मोदी ने वर्तमान संकट का राजनीतिकरण करने वालों को आगाह करते हुए कहा कि मौजूदा हालात में स्वार्थ भरी राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि अफवाहें फैलाने वाले लोग देश को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘वर्तमान में हमारे पड़ोस में एक माह से भीषण युद्ध जारी है। यह निश्चित तौर पर चुनौतीपूर्ण समय है। मैं आज ‘मन की बात’ के माध्यम से सभी देशवासियों से फिर यह आग्रह करूंगा कि हमें एकजुट होकर इस चुनौती से बाहर निकलना है।’’ उन्होंने कहा कि जो लोग इस विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश के 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा विषय है और इसमें स्वार्थ भरी राजनीति का कोई स्थान नहीं है।
हमने देश के 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से पुराने संकटों को हराया था, इस बार भी हम सब मिलकर इन कठिन हालात से विजयी बनकर बाहर निकल जाएंगे।- मोदी
जागरूक रहें, अफवाहों के बहकावे में न आएं
उन्होंने कहा, ‘‘अफवाह फैला रहे लोग देश का बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं। मैं सभी देशवासियों से अपील करूंगा कि वे जागरूक रहें, अफवाहों के बहकावे में न आएं। सरकार की तरफ से आपको जो निरंतर जानकारी दी जा रही है, उसी पर विश्वास करके कोई कदम उठाएं।’’
मोदी ने कहा कि उन्हें हर बार की तरह इस बार भी विश्वास है कि जैसे ‘‘हमने देश के 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से पुराने संकटों को हराया था, इस बार भी हम सब मिलकर इन कठिन हालात से विजयी बनकर बाहर निकल जाएंगे।’’ मोदी ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे और वहां काम कर रहे एक करोड़ भारतीयों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए वह उन देशों के अत्यंत आभारी हैं।
हमारे वैश्विक संबंध, अलग-अलग देशों से मिल रहा सहयोग और पिछले एक दशक में देश का जो सामर्थ्य बना है, इनकी वजह से भारत इन परिस्थितियों का डटकर मुकाबला कर रहा है।
पीएम मोदी ने किया कोविड संकट का जिक्र
उन्होंने कहा, ‘‘जिस क्षेत्र में अभी युद्ध चल रहा है, वह हमारी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा केंद्र है। इसकी वजह से दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल को लेकर संकट की स्थिति बनती जा रही है। हमारे वैश्विक संबंध, अलग-अलग देशों से मिल रहा सहयोग और पिछले एक दशक में देश का जो सामर्थ्य बना है, इनकी वजह से भारत इन परिस्थितियों का डटकर मुकाबला कर रहा है।’’ उन्होंने कहा कि मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर बहुत ही हलचल भरा रहा है।
मोदी ने कहा, ‘‘हम सबको याद है कि पूरा विश्व भूतकाल में कोविड के कारण एक लंबे समय तक अनेक समस्याओं से गुजरा था। हम सभी की अपेक्षा थी कि कोरोना वायरस के संकट से निकलने के बाद दुनिया नए सिरे से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगी, लेकिन दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियां बनती चली गईं।’
पीएम ने पश्चिम एशिया संकट पर कई नेताओं से की बात
पश्चिम एशिया संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने पड़ोस में अमेरिका के सहयोगियों और इजराइल को निशाना बनाया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौवहन को बाधित कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और इसके जरिये दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम पोतों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है।
पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से मोदी ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ईरान, फ्रांस, इजराइल और मलेशिया सहित विश्व के कई नेताओं से बात की है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की है। मोदी ने दोनों नेताओं के बीच 24 मार्च को टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद कहा था कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर ‘‘विचारों का सार्थक आदान-प्रदान’’ हुआ।