भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाए गए हैं। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर ऊर्जा, उर्वरक, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर बताया कि बैठक में व्यापार, उर्वरक, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर सकारात्मक बातचीत हुई। उन्होंने पिछले साल दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुए इंडिया-रूस समिट के फैसलों को लागू करने के लिए दोनों देशों के प्रयासों की सराहना की।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बैठक के बाद कहा कि दोनों पक्षों ने व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, उर्वरक, कनेक्टिविटी और मोबिलिटी के साथ-साथ तकनीक, इनोवेशन और क्रिटिकल मिनरल्स में नए अवसरों पर चर्चा की। वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक हालात पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई।
वेस्ट एशिया में इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद पैदा हुए संकट के कारण ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसके चलते रूस फिर से भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा सप्लायर बनकर उभरा है। भारत उर्वरक की अतिरिक्त आपूर्ति के लिए भी रूस पर नजर बनाए हुए है।
मंतुरोव की यात्रा से कुछ दिन पहले विदेश सचिव विक्रम मिस्री और रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने नई दिल्ली में बैठक कर द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की थी।
इस दौरे के बीच भारत ने रूस से पांच और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का फैसला भी लिया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम के प्रदर्शन के बाद यह निर्णय लिया गया। भारत ने 2018 में रूस के साथ 5 अरब डॉलर का समझौता कर पांच S-400 सिस्टम खरीदने का करार किया था, जिसमें से तीन सिस्टम की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि यूक्रेन युद्ध के कारण बाकी दो की डिलीवरी में देरी हुई है।