घायल योंगेंद्र को मिलवाया गया परिवार से 
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कांवड़ यात्रा पूरी कर लौटा तो अस्पताल में मिला लापता पिता

नशे की एक-दो कश ने बिगाड़ी थी हालत

निधि, सन्मार्ग संवाददाता

हावड़ा : श्रावण मास में तारकेश्वर में भोले बाबा को जल चढ़ाने के लिए कोलकाता के लेकटाउन से कांवड़ियों का एक दल रवाना हुआ था। इसी दल में दक्षिणदाड़ी निवासी और पेशे से दिहाड़ी मजदूर योगेंद्र मल्लिक भी शामिल थे। दल शेवड़ाफुली से जल लेकर तारकेश्वर की ओर बढ़ रहा था। तभी रास्ते में कुछ देर आराम करने के लिए सभी एक विश्राम स्थल पर रुके। यहीं योगेंद्र की मुलाकात कुछ अन्य यात्रियों से हुई। बातचीत के दौरान उन्हें नशे का पदार्थ पीने के लिए दिया गया। बताया जाता है कि योगेंद्र ने उसे गांजा समझकर एक-दो कश लगा लिए। लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। बाद में पता चला कि वह गांजा नहीं, बल्कि ''फटास'' नामक कोई नशीला पदार्थ था। योगेंद्र को तेज उल्टियां होने लगीं और वह रास्ते में बेहोश होकर गिर पड़ा। पिता को खोज रहा था बेटा तो जिन्हें हैम रेडियो ने आखिरकार मिलवा दिया। हैम रेडियो के अंबरिश नाग विश्वास ने बताया कि पुलिस ने बेहोशी की हालत में योगेंद्र को श्रीरामपुर वॉल्स अस्पताल में भर्ती कराया।

सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़ा था योगेंद्र

इधर घर पर पिता के वापस नहीं लौटने से परिवार चिंतित था। बेटे आनंद मल्लिक ने पिता को काफी तलाशा, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अंततः आनंद ने खुद जल लेकर तारकेश्वर की यात्रा शुरू की और भोले बाबा को जल चढ़ाकर घर लौट आया। इस बीच अस्पताल से योगेंद्र के संबंध में हैम रेडियो को सूचना मिली। वेस्ट बंगाल रेडियो क्लब ने उसकी तस्वीर के जरिए पहचान की मुहिम शुरू की। आखिरकार पता चला कि योगेंद्र लेकटाउन के दक्षिणदाड़ी के रहने वाला है। हैम रेडियो के माध्यम से सूचना मिलते ही बेटा आनंद अस्पताल पहुंचा और लंबे समय से लापता पिता को देखकर उसकी तलाश खत्म हुई। इसके बाद वह पिता को अपने साथ सुरक्षित घर ले गया।

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