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बजट में अल्पसंख्यकों की अनदेखी, विदेश-बिजनेस मंत्रालय पर बहस की मांग

नयी दिल्ली : केंद्रीय बजट में अल्पसंख्यकों का जिक्र न होने और राज्यसभा में अहम मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा की मांग को लेकर शुक्रवार को विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला। तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि बजट भाषण में अल्पसंख्यकों की अनुपस्थिति भाजपा सरकार की सोच को दिखाती है। राज्यसभा में टीएमसी नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के करीब 85 मिनट लंबे बजट भाषण में किसी भी धार्मिक, सामाजिक या भाषाई अल्पसंख्यक समुदाय का एक बार भी उल्लेख नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पूरे भाषण में ‘माइनॉरिटी’ शब्द सिर्फ एक बार आया, वह भी ‘माइनॉरिटी शेयरहोल्डर’ के संदर्भ में। डेरेक ने कहा कि यही चुप्पी सरकार की मानसिकता को उजागर करती है, जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत का माहौल बनाती है। उन्होंने यह भी बताया कि ईसाई समुदाय द्वारा संचालित 2,000 से ज्यादा संस्थानों के एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं, जबकि इन स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले अधिकतर छात्र दूसरे समुदायों से हैं। विपक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग लंबे समय से निष्क्रिय पड़ा है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के सभी पद एक साल से ज्यादा समय से खाली हैं। सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल 2025 में चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा के रिटायर होने के बाद अब तक नई नियुक्ति नहीं हुई और आयोग की कोई बैठक भी नहीं हुई। इधर, विपक्षी दलों ने विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के कामकाज पर भी चर्चा की मांग की है। गुरुवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में कांग्रेस, टीएमसी, सपा, डीएमके, आप, सीपीआई (एम), आरजेडी, झामुमो सहित कई दलों ने इस पर सहमति जताई। विपक्ष का कहना है कि पिछले दस साल से ज्यादा समय से इन मंत्रालयों पर राज्यसभा में चर्चा नहीं हुई, जबकि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात और व्यापारिक चुनौतियों को देखते हुए यह जरूरी है। हालांकि सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय पर चर्चा का प्रस्ताव रखा है। टीएमसी ने संकेत दिए हैं कि बजट सत्र के दूसरे चरण में ‘डिमांड फॉर ग्रांट्स’ बहस के दौरान वह मनरेगा में बंगाल के बकाया 52,000 करोड़ रुपये जारी करने का मुद्दा जोर-शोर से उठाएगी।

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